दिल्ली के मोलरबंद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता एक एमजीडी बढ़ेगी, जानें क्या होगा फायदा?
Edited By Amit Kasana

निरीक्षण करते सोमनाथ भारती
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निरीक्षण करते सोमनाथ भारती
नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमनाथ भारती ने शनिवार को बदरपुर क्षेत्र स्थित मोलरबंद वेस्ट वाटर (सीवरेज) ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान डीजेबी उपाध्यक्ष ने प्लांट के संचालन का निरीक्षण किया और अधिकारियों से इस प्लांट में सीवर के पानी को शोधित करने के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक की जानकारी ली।
उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मोलरबंद प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 1 एमजीडी की जाए। साथ ही प्लांट के शोधित पानी की गुणवत्ता का स्तर 10/10 किया जाए और आस पास के क्षेत्रों के सीवर नेटवर्क को इस प्लांट से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से कहा गया है कि इस प्लांट के शोधित पानी का गैर पीने योग्य कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए मोलरबंद प्लांट में फिलिंग स्टेशन का निर्माण किया जाए।
मोलरबंद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमनाथ भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली के सीवर के पानी को ट्रीट करने के लिए दिल्ली में 35 एसटीपी काम कर रहे हैं। इन प्लांट्स में प्रतिदिन 547 एमजीडी सीवेज को ट्रीट किया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड यमुना को साफ करने के लिए सभी एसटीपी के शोधित पानी मानक 10/10 तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के 10 / 10 मानक के शोधित पानी का इस्तेमाल सबसे पहले गैर पीने योग्य कार्यों जैसे निर्माण कार्य, उद्योगों , पार्कों की सिंचाई, सड़कों की सफाई और कृषि में इस्तेमाल की कोशिश की जा रही है।
सोमनाथ भारती ने आज मोलरबंद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 0.6 एमजीडी है। दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को इस प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 1 एमजीडी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि मोलरबंद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित पानी की गुणवत्ता को 10 / 10 करने के प्रयास किए जा रहे है। यह प्लांट 30/50 स्टैंडर्ड के मुताबिक डिजाइन किया गया है लेकिन बेहतर संचालन और प्रबंधन के चलते इसके शोधित पानी की गुणवत्ता का स्तर 11/22 का है। इस प्लांट की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की यहां काफी संभावनाएं है।
प्लांट के निरीक्षण के दौरान दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष द्वारा अधिकारियों से कहा गया कि यहां पर एक नए फिलिंग स्टेशन का निर्माण किया जाए। ताकि प्लांट के शोधित पानी का इस्तेमाल गैर पीने योग्य कार्यों में किया जा सके। इससे पीने के पानी की काफी बचत की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला स्लज खेती के लिए काफी फायदेमंद होता है। यहां स्लज बनाने वाली एक मशीन बंद पड़ी है।अधिकारियों से कहा गया है कि इस मशीन को चालू किया जाए और स्लज से ब्रिक्स का निर्माण किया जाए। स्लज ब्रिक्स आस पास के किसानों को दिल्ली जल बोर्ड द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
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