Six Crores Were Cheated From One Thousand People: खाड़ी देशों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक हजार से अधिक लोगों से ठगी करने वाले रैकेट का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सहित सात आरोपितों को दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में छापेमारी कर दबोचा है आरोपियों ने देशभर के 1000 से ज्यादा लोगों से छह करोड़ से अधिक की ठगी की है। आरोपितों के पास से आठ लैपटॉप, 12 मोबाइल, 110 पासपोर्ट और धोखाधड़ी में प्रयुक्त अन्य सामग्री बरामद की है।
आरोपियों की पहचान
आरोपियों की पहचान गिरोह सरगना इनामुल हक अंसारी, इकराम मुजफ्फर, ताबिश हासमी उर्फ विक्रांत, मो. तबरेज आलम, तारिक शम्स, महेश कुमार और सोमनाथ कुमार के रूप में हुई है। अधिकतर आरोपी बिहार के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। तारिक शम्स बिट्स भोपाल से बीटेक पास है जबकि इनामुल हक ने भी बीटेक में दाखिला लेकर पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से पीड़ितों के 110 पासपोर्ट, वारदात में इस्तेमाल आठ लैपटॉप, 12 मोबाइल और भारी मात्रा में अन्य सामान बरामद किया है।
‘न्यू विजन इंटरप्राइजेज कंपनी’
अपराध शाखा को विशेष आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिये कुछ लोगों ने विज्ञापन देखकर खाड़ी देशों और मलयेशिया समेत दूसरे मुल्कों में नौकरी के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद महिपालपुर स्थित ‘न्यू विजन इंटरप्राइजेज कंपनी’ से कॉल और ईमेल आई। आरोपियों ने पीड़ितों से वीजा, मेडिकल चेकअप और समेत दूसरे कामों के लिए 60 हजार रुपये साथ कागजात जमा करा लिए। इसके बाद आरोपियों ने अपने-अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए। शिकायतें मिलने के बाद शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
अधिकतर शिकायतकर्ता केरल से
अपराध शाखा को विशेष आयुक्त यादव ने बताया कि ज्यादातर शिकायतकर्ता केरल से हैं। जांच के बाद गठित टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टेक्निकल सर्विलांस के अलावा दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच के बाद आरोपियों की पहचान की। पुलिस ने इनामुल हक अंसारी को जामिया नगर के जाकिर नगर से दबोच लिया। इसके बाद अन्य आरोपियों को दिल्ली के दूसरे इलाकों से गिरफ्तार कर लिया गया। इनामुल हक ने बताया कि वह छह सालों से लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठग रहा था।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक खाते खुलवाए
आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर शेल कंपनियां बनाने के अलावा बैंक खाते खुलवाए थे। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखने के बाद आरोपी इनको कॉल करते थे। इनके दफ्तर में बैठे टेलीकॉलर वर्क परमिट के नाम पर इनसे 60 हजार की डिमांड करते थे। रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवाने के बाद कई खातों में घुमाकर उनको निकाल लिया जाता था। ताबिश इनामुल का करीबी ताबिश टेलीकॉलर का काम करता था।
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