दिल्ली में आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘ब्लैक इमरजेंसी डे’ सेमिनार में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 1975 के आपातकाल को देश कभी नहीं भूल सकता और इसे हर साल उसी तरह याद किया जाना चाहिए, जैसे दशहरे पर रावण दहन किया जाता है. राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी द्वारा “संविधान हत्या दिवस” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यह दिन देशवासियों को याद दिलाता है कि भारत की जनता कभी भी आपातकाल जैसी अन्यायपूर्ण स्थिति को दोबारा स्वीकार नहीं करेगी.

राहुल गांधी पर साधा निशाना, जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी के संघर्ष को किया याद

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कार्यक्रम के संबोधन में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र उन लोगों का गुलाम नहीं है, जो अपनी जेब में संविधान की प्रति रखकर यह कहते हैं कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है. उन्होंने कहा कि संविधान किसी एक व्यक्ति की जेब में नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और व्यवस्था का आधार है तथा लोकतंत्र किसी का निजी अधिकार या गुलाम नहीं हो सकता. उन्होंने आगे कहा कि जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने आपातकाल के सबसे कठिन दौर में भी हार नहीं मानी और लोकतंत्र की भावना को जीवित रखा. कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा भी मौजूद रहे. इस दौरान आपातकाल के समय जेल जाने वाले कई लोगों को सम्मानित भी किया गया.

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा को बताया सच्चे नेतृत्व की पहचान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सच्चा नेता वह नहीं होता जो केवल सत्ता या व्यक्तिगत लाभ के लिए काम करे, बल्कि वह होता है जो जनता के हितों की रक्षा करे, लोकतंत्र को मजबूत बनाए और संविधान की गरिमा को सर्वोपरि रखे. गौरतलब है कि भारत में आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान लागू रहा था, जिसे भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादित और कठिन दौरों में से एक माना जाता है.