Old Delhi fake NGO: इन दिनों पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक गलियों और बाजारों में लगे कुछ अनोखे पोस्टर हर आने-जाने वाले का ध्यान खींच रहे हैं. यह पोस्टर किसी चुनाव या विज्ञापन के नहीं, बल्कि इलाके के लोगों को "सावधान" करने के लिए लगाए गए हैं. चांदनी चौक और सीताराम बाजार जैसे घने रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में लगे इन पोस्टरों में साफ तौर पर लिखा है कि लोग फर्जी एनजीओ (NGO) से सावधान रहें. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ फर्जी संगठन समाज सेवा की आड़ में सरेआम ब्लैकमेलिंग का धंधा चला रहे हैं.
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घर बनाने के नाम पर उगाही का खेल
पुरानी दिल्ली के लोगों का कहना है कि नियमानुसार अपना घर बनाने या उसमें किसी भी तरह की मरम्मत कराने के लिए नगर निगम (MCD) से नक्शा पास कराना और संबंधित विभागों से एनओसी (NOC) लेना जरूरी होता है. लेकिन जमीनी हकीकत यह बन चुकी है कि सरकारी मंजूरी से पहले इन फर्जी एनजीओ की 'हरी झंडी' यानी रिश्वत जरूरी हो गई है. अगर कोई नागरिक बिना इन्हें पैसे दिए काम शुरू करता है, तो ये संगठन आरटीआई (RTI), जनहित याचिका (PIL) और झूठी शिकायतों का डर दिखाकर काम रुकवा देते हैं और मोटी रकम की मांग करते हैं.
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अदालत भी जता चुकी है चिंता
ब्लैकमेलिंग के इस खेल पर देश की अदालतें भी कई बार सख्त टिप्पणियां कर चुकी हैं. कोर्ट ने माना है कि कुछ तथाकथित एनजीओ, आरटीआई एक्टिविस्ट और शिकायतकर्ता कानून का इस्तेमाल लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने के लिए एक हथियार की तरह कर रहे हैं. पुरानी दिल्ली में भी ठीक ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जिससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है.
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पुलिस और प्रशासन पर सुस्ती के आरोप
इस गुंडागर्दी और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर स्थानीय लोगों ने कई बार दिल्ली पुलिस और एमसीडी के आला अधिकारियों से लिखित शिकायत की है. भारी दबाव के बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) तो दर्ज कर ली है, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित है. पुलिस की तरफ से अब तक इन फर्जी एनजीओ के खिलाफ कोई ठोस या सख्त कदम नहीं उठाया गया है. यही वजह है कि कानूनी कार्रवाई के बावजूद इलाके में लोगों को डराने-धमकाने और परेशान करने का यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे परेशान होकर अब लोगों को सड़कों पर पोस्टर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
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