दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लेकिन अब सवाल उन लाखों फ्लैट बायर्स का भी है, जिन्होंने सरकारी एजेंसियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर आशियाना खरीदा है.
इसी बीच VCL Group के मालिक वीरेंद्र गर्ग की जोधपुर मामले में गिरफ्तारी ने NBCC की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि जोधपुर में VCL द्वारा किए गए निर्माण में गुणवत्ता और फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई थीं. मामले में SIT जांच के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुईं और वीरेंद्र गर्ग पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया. बाद में उन्हें हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया.
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सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि VCL Group ने Amrapali Golf Homes, Amrapali Kingwood और Leisure Park समेत Amrapali के कई प्रोजेक्ट्स में काम किया है. इन प्रोजेक्ट्स में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर होम बायर्स पहले भी शिकायतें करते रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल NBCC से है.अगर VCL के काम को लेकर गंभीर शिकायतें और जांच सामने आ चुकी थीं, तो NBCC ने इसी ग्रुप को लगातार महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में काम कैसे दिया? क्या हर नए प्रोजेक्ट से पहले कंपनी की तकनीकी क्षमता और पुराने निर्माण का स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया? क्या NBCC ने पुराने प्रोजेक्ट्स का स्ट्रक्चरल और सेफ्टी ऑडिट कराया?
Amrapali Golf Homes और Leisure Park में VCL द्वारा किए गए सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
अब मांग सिर्फ VCL की जवाबदेही तक सीमित नहीं है. VCL के साथ NBCC की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी स्वतंत्र जांच जरूरी है. होम बायर्स का सवाल सीधा है—अगर आशियाना बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर सवाल हैं, तो निगरानी करने वाली सरकारी एजेंसी की जवाबदेही कौन तय करेगा? इसी मांग को लेकर गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी VCL के काम के साथ NBCC की भूमिका की जांच की मांग उठाई जाएगी. अब सवाल सिर्फ VCL की जवाबदेही का नहीं, NBCC की जवाबदेही का भी है.
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