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दिल्ली के नरेला में बनने जा रही हाई सिक्योरिटी जेल, कैदियों का बाहर निकलना मुश्किल, तिहाड़ का बोझ होगा कम

New Prison In Delhi: दिल्ली के सजा पाए हुए या अंडरट्रायल कैदियों को तिहाड़ जेल में रखा जाता है, जहां क्षमता से ज्यादा कैदी मौजूद हैं. ऐसे में दिल्ली सरकार नरेला में नया हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है, जिससे तिहाड़ का बोझ हल्का हो जाएगा.

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Narela High Security Prison (AI Image)

मुख्य बिंदु

  • नरेला हाई सिक्योरिटी जेल की आधारशिला रखी गई है.
  • इस प्रोजेक्ट को लगभग ₹100 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा.
  • तिहाड़ जेल के ज्यादा जोखिम वाले कैदियों को चरणों में यहाँ शिफ्ट किया जाएगा.
  • इस जेल में एडवांस्ड सर्विलांस और कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था होगी.
  • इस प्रोजेक्ट का मकसद दिल्ली में जेलों में भीड़ कम करना और जेल मैनेजमेंट को बेहतर बनाना है.

Narela High Security Prison: दिल्ली सरकार ने नरेला हाई सिक्योरिटी जेल प्रोजेक्ट शुरू करके जेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान इस नई सुविधा की आधारशिला वर्चुअली रखी. उम्मीद है कि ये जेल तिहाड़ जेल में भीड़भाड़ कम करेगी और साथ ही ज्यादा जोखिम वाले कैदियों को रखने के लिए एक आधुनिक और सुरक्षित माहौल देगी. अधिकारियों का मानना ​​है कि ये प्रोजेक्ट जेल प्रशासन को मजबूत करेगा और कुल मिलाकर सिक्योरिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा.

कितना आएगा खर्च?

दिल्ली सरकार के मुताबिक, इस हाई-सिक्योरिटी जेल को बनाने में तकरीबन 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. निर्माण पूरा होने के बाद, हाई रिस्क वाले कैदियों और तिहाड़ जेल में बंद कुछ चुने हुए कैदियों को चरणों में नई जेल में शिफ्ट किया जाएगा. इस कदम से कैदियों के मैनेजमेंट में सुधार होने और मौजूदा तिहाड़ जेल परिसर पर दबाव कम होने की उम्मीद है.

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दिल्ली की सीएम ने बताई अहमियत

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि तिहाड़ जेल घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, जिससे सुरक्षा, कैदियों को कोर्ट ले जाने, ट्रैफिक जाम और आस-पास रहने वाले लोगों को होने वाली असुविधा जैसी चुनौतियां पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि जेल अपनी मंजूर क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों के साथ चल रही है, इसलिए बेहतर सुरक्षा सुविधाओं वाली एक एडिशनल जेल बनाना जरूरी हो गया है.

नए जेल की खासियत

नरेला हाई सिक्योरिटी जेल को आधुनिक सुरक्षा मानकों और एडवांस्ड सर्विलांस टेक्नोलॉजी के साथ बनाया जाएगा. इसमें मल्टी-लेयर सुरक्षा सिस्टम, ऊंची बाउंड्री वॉल, CCTV मॉनिटरिंग, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस कंट्रोल, वॉचटावर, सुरक्षित बैरक और एक सेंट्रल कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर जैसी सुविधाएँ होंगी. इन उपायों का मकसद ज्यादा सुरक्षा की जरूरत वाले कैदियों पर कड़ी नजर रखना और जेल के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाना है.

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तिहाड़ में क्षमता से ज्यादा कैदी

तिहाड़ जेल भारत के सबसे बड़े जेल परिसरों में से एक है और लंबे समय से यहां भीड़भाड़ की समस्या रही है. हालांकि इसकी मंजूर क्षमता तकरीबन 10,000 कैदियों की है, लेकिन अभी यहां लगभग 19,500 कैदी बंद हैं, जो तय सीमा से लगभग दोगुनी है. COVID-19 महामारी के दौरान, अधिकारियों ने भीड़ कम करने के लिए लगभग 4,000 कैदियों को कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया था.

तिहाड़ का बोझ कम करने की कोशिश

अधिकारियों का कहना है कि नई नरेला जेल क्षमता से जुड़ी ऐसी समस्याओं को हल करने में मदद करेगी और साथ ही कैदियों और जेल स्टाफ के लिए सुरक्षित माहौल बनाएगी. दिल्ली अभी तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलें चलाती है, और नरेला हाई सिक्योरिटी जेल के जुड़ने से राजधानी के जेल इंफ्रास्ट्रक्चर के काफी मजबूत होने की उम्मीद है.

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निष्कर्ष

नरेला हाई सिक्योरिटी जेल के दिल्ली के सुधार गृह इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है. तिहाड़ जेल में भीड़ कम करके और एडवांस्ड सुरक्षा इंतजाम देकर, ये सुविधा जेल प्रशासन, कैदियों की सुरक्षा और कामकाज की क्षमता को बेहतर बनाएगी. ये प्रोजेक्ट टेक्नोलॉजी पर आधारित सुरक्षा उपायों के जरिए पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर सरकार के फोकस को भी दिखाता है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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