दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में हुए दर्दनाक आग हादसे को लेकर National Human Rights Commission (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है. इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें तीन बच्चे और एक 70 साल की बुजुर्ग महिला भी शामिल थी, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. घटना 18 मार्च 2026 को एक चार मंज़िला इमारत में लगी भीषण आग के कारण हुई थी.
असल में आग सुबह करीब 6:15 बजे लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई. आग की शुरुआत ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकान से हुई, जिसके बाद ऊपर के रिहायशी फ्लोर में रह रहे लोग अंदर ही फंस गए. मौके पर मौजूद लोगों ने हालांकि बचाव अभियान चलाया था उन्होंने अपने स्तर पर खिड़कियां और दीवारें तोड़कर लोगों को निकालने की कोशिश की, इस दौरान कुछ लोग घायल भी हो गए.
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हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग पर भी सवाल उठाए हैं. आरोप है कि फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक क्रेन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई. लोगों का कहना है कि अगर मशीन सही समय पर काम करती तो शायद ज्यादा लोगों की जान बच सकती थी.
NHRC ने मामले को गंभीर मानते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यह भी पूछा है कि पीड़ित परिवार और घायलों को अब तक क्या मुआवजा दिया गया है और आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
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