मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध का सीधा असर अब देश की राजधानी दिल्ली की गलियों और रसोई तक पहुंच गया है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास और शहर के कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है. सुबह तड़के से ही लोग खाली सिलेंडर लेकर लंबी-लंबी कतारों में लग जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई परिवारों को खाली हाथ ही घर लौटना पड़ रहा है. सरकार भले ही सप्लाई सामान्य होने का भरोसा दिला रही है, पर जमीनी हकीकत में आम जनता की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.
प्रवासी मजदूरों पर दोहरी मार
इस गैस संकट ने सबसे ज्यादा उन प्रवासी मजदूरों को तोड़ा है जो दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं. दैनिक मजदूरी करने वाले इन परिवारों के लिए अब छोटा सिलेंडर भी ऊंचे दामों पर मिलना मुश्किल हो गया है. मजदूरों का कहना है कि वे रोज कमाकर अपना पेट पालते हैं, लेकिन अब गैस न मिलने से उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि वे खाना कैसे बनाएंगे और काम पर कैसे जाएंगे. बाजार में बढ़ती किल्लत के बीच ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी लग रहे हैं क्योंकि जरूरतमंदों को सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि चोरी-छिपे इसे महंगे रेट पर बेचा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: ऊर्जा संकट के बीच गुड न्यूज, 58 हजार मिट्रिक टन LPG से भरा 7वां टैंकर आ रहा भारत
मकान मालिकों की सख्ती
गैस न मिलने की सूरत में कई परिवारों ने लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा लेने की कोशिश की, लेकिन वहां भी उन्हें नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली के कई इलाकों में मकान मालिकों ने किरायेदारों को घर के अंदर या छत पर पारंपरिक चूल्हा जलाने की इजाजत देने से साफ मना कर दिया है. धुएं और आग के डर से लगाई गई इन पाबंदियों ने गरीब परिवारों को लाचार कर दिया है क्योंकि उनके पास अब खाना पकाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी एक बड़ी जंग जैसा बन गया है.
दिल्ली छोड़ गांव लौटने को मजबूर हुए लोग
बढ़ते मानसिक और आर्थिक दबाव के बीच अब दिल्ली से प्रवासियों का पलायन बड़े स्तर पर शुरू हो गया है. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ऐसे कई परिवार देखे जा रहे हैं जो अपना सामान समेटकर वापस अपने गांव की ओर रुख कर रहे हैं. मजदूरों का कहना है कि जब राजधानी में खाना बनाने की सुविधा ही नहीं बची, तो यहां रहकर क्या करेंगे. उनका मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट के हालात और गैस की सप्लाई ठीक नहीं होती, तब तक गांव में रहना ही सुरक्षित और सस्ता विकल्प है. यह स्थिति दर्शाती है कि दूर देश में छिड़ी जंग ने कैसे भारत के आम आदमी की जिंदगी को बेपटरी कर दिया है.
संबंधित खबरें
1984 हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने हरि नगर पहुंचीं Rekha Gu रेखा गुप्ता
1 hr agoदिल्ली के किन इलाकों में 2 नवंबर को कटेगी बिजली? चेक करें शटडाउन लिस्ट
5 hrs agoग्रेजुएट्स के लिए DU में जॉब पाने का मौका, 19 नवंबर से पहले करें आवेदन
10 hrs agoदिल्ली में आज से Grap की पाबंदियां लागू, BS6 से नीचे के वाहनों पर रहेगी रोक
11 hrs ago'मार्च करें और थोड़ी सी शॉपिंग भी कर लें', रैली से पहले राहुल गांधी की अपील
21 hrs agoINDIA ब्लॉक की रैली में शामिल नहीं होगी CJP, अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
22 hrs agoरामलीला मैदान रैली से आज थमेगी दिल्ली की रफ्तार! ट्रैफिक एडवाइजरी जारी
1 day agoमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग में विकास कार्यों का किया उद्घाटन
1 day agoPM मोदी का यूपी वालों को तोहफा, जल्द इन रूटों पर फर्राटा भरेगी बुलेट ट्रेन
1 day agoदिल्ली के किन इलाकों में 1 नवंबर को कटेगी बिजली? देखें शेड्यूल
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines