शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव नतीजों का ऐलान हुआ. एक बार फिर विश्वविद्यालय को अपने चार नए नेता मिले यानि देश की राजनीति का पहली सीढ़ी इन चारों ने भी पार कर ली. दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी को राजनीति की नर्सरी कहा जाता है. जैसे देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, वैसे ही पॉलिटिक्स में कदम रखने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय ही पहला पड़ाव है. DU की छात्र राजनीति से निकले नेता विधायक, मंत्री, सांसद, केंद्रीय मंत्री से लेकर देश के बड़े दिग्गज बने. वैसे तो देश की ज्यादातर यूनिवर्सिटी में चुनाव होते हैं, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी की बात ही कुछ अलग है.
DU क्यों है राजनीति की नर्सरी?
दरअसल, नेशनल पॉलिटिकल पार्टियों का दिल्ली यूनिवर्सिटी में खास दबदबा होता है. स्टूडेंट यूनियन के इलेक्शन में आमतौर पर कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और BJP समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच ही कांटे की टक्कर देखी जाती है. इसके साथ ही कई और राजनीतिक दलों की स्टूडेंट्स यूनियन भी चुनावों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. सभी राष्ट्रीय पार्टियों की नजर सीधे DUSU चुनाव पर होती है और इसमें जीतने वाले छात्र नेताओं को सीधे बड़ी पार्टियों में एंट्री लेते हैं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से देश को कितने दिग्गज मिले?
दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन में जीतने वाले कई नेताओं का नाम भारत के दिग्गजों में शामिल हो गया. इनमें सबसे ऊपर है अरुण जेटली का नाम, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1974 में DUSU अध्यक्ष के तौर पर की और आगे जाकर बीजेपी से जुड़े और केंद्रीय वित्त मंत्री बने. वहीं, बीजेपी नेता विजय गोयल का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है, जिन्होंने 1977 में DUSU अध्यक्ष के तौर पर काम किया और आगे जाकर केंद्रीय राज्य मंत्री चुने गए.
अजय माकन, रेखा गुप्ता का नाम भी शामिल
इसके बाद नाम आता है कांग्रेस नेता अजय माकन का, जो 1985 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष चुने गए और बाद में केंद्रीय मंत्री बने. कांग्रेस नेता अलका लांबा की जड़ें भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़ी हैं. 1995 में DUSU अध्यक्ष पद संभालने के बाद वो दिल्ली विधानसभा की विधायक बनीं और महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद संभाला. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता की राजनीति में एंट्री DUSU से ही हुई. रेखा गुप्ता 1995 में दिल्ली यूनिवर्सिटी की सचिव बनीं और उसके बाद 1996-97 के बीच अध्यक्ष रह चुकी हैं. इनके अलावा नुपूर शर्मा, रागिनी नायक जैसे कई ऐसे नाम हैं जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की देन हैं.
क्यों खास है डीयू की राजनीति?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में देशभर के राज्यों से छात्र आते हैं. कश्मीर से कन्याकुमारी तक यहां स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं. ये दिल्ली विश्वाविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत है, क्योंकि जब कोई छात्र स्टूडेंट यूनियन के चुनाव लड़ता है तो वो भारत के जातिगत समीकरणों और क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ता है. इसलिए जब यहां से नेता चुने जाने के बाद वो भारत की राजनीति में कदम रखते हैं, तो वो इस तरह की कूटनीति के लिए पहले से ही तैयार होते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी की सीढ़ी पार करने के बाद छात्र सभी तरह के दांव पेंच समझ जाते हैं और राष्ट्रीय राजनीति में बड़े मुकाम हासिल कर लेते हैं.