मुख्य जानकारी:
- दिल्ली के सभी फ्यूल पंपों पर अब बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट के किसी भी गाड़ी को ईंधन नहीं दिया जाएगा.
- 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस6 वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी.
- सर्दियों के दौरान खुले में कूड़ा, पत्तियां या प्लास्टिक जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ड्रोन कैमरों से रात में निगरानी होगी.
- 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच दिल्ली के भीतर सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
- इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत केस दर्ज कर परिसर सील किए जाएंगे.
Delhi Winter Plan: सर्दियों के मौसम में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अभी से एक बेहद सख्त और स्थायी शीतकालीन कार्य योजना का ऐलान कर दिया है. नए नियमों के मुताबिक दिल्ली में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-VI से नीचे की श्रेणी वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी. इसके साथ ही 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस को दोगुना कर दिया जाएगा. सरकार का मुख्य उद्देश्य गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करना और पिछले तीन वर्षों में लगातार 312 से 494 के बीच रिकॉर्ड किए गए खतरनाक एक्यूआई (AQI) के स्तर में सुधार लाना है.
क्या नए नियम बनाए गए हैं?
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) को लेकर सबसे कड़ा रुख अपनाया गया है. अब दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर पूरे साल केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन या तेल मिल सकेगा, जिनके पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट होगा. इस नियम को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों और डिजिटल डेटाबेस के जरिए गाड़ियों की चौबीसों घंटे निगरानी करेगा. यदि कोई भी वाहन बिना वैध पीयूसी के पाया जाता है, तो उसके मालिक पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
किन गाड़ियों को दिल्ली में एंट्री की छूट दी जाएगी?
1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली से बाहर के बीएस-VI से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू रहेगा. हालांकि, आम जनता की सहूलियत और आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने कुछ वाहनों को इस दायरे से बाहर रखा है. दिल्ली में प्रवेश करने वाले सीएनजी वाहनों, इलेक्ट्रिक वाहनों, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियों को इस पाबंदी से पूरी तरह छूट दी जाएगी. इनके अलावा निर्माण सामग्री लेकर आने वाले अन्य सभी कमर्शियल बाहरी वाहनों के प्रवेश को वर्जित रखा जाएगा.
दिल्ली मेट्रो के पार्किंग स्थलों को बाहर क्यों रखा गया है?
प्रदूषण नियंत्रण अवधि के दौरान निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग फीस को दोगुना करने का निर्णय लिया गया है. लेकिन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के नियंत्रण वाले पार्किंग स्थलों को इस बढ़ी हुई फीस के दायरे से बिल्कुल बाहर रखा गया है. इसके पीछे सरकार का मुख्य तर्क यह है कि पार्किंग महंगी होने से लोग अपनी कारों और बाइकों को निकालने से बचेंगे. वहीं मेट्रो पार्किंग के रेट सामान्य रहने से लोग सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
वर्क फ्रॉम होम को लेकर सरकार ने क्या निर्देश जारी किए हैं?
हवा की गुणवत्ता को गंभीर श्रेणी में जाने से रोकने के लिए सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम करना जरूरी है. इसीलिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ही शारीरिक रूप से दफ्तर आकर काम करने की अनुमति होगी. शेष 50 प्रतिशत स्टाफ के लिए वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करना पूरी तरह अनिवार्य रहेगा. इसके साथ ही निजी कंपनियों को कार-पूलिंग को बढ़ावा देने, सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करने और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग शिफ्ट लागू करने को कहा गया है.
एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सिस्टम लगाने की समय सीमा
निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच इन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. इसके साथ ही तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी कमर्शियल ऊंची इमारतों, मॉल, होटलों और कार्यालय भवनों में एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. सभी संस्थानों को 15 अगस्त तक अपने परिसरों में यह धूल नियंत्रक प्रणाली हर हाल में लगानी होगी. यही नियम एक हजार वर्गमीटर से बड़े सभी एक्टिव निर्माण स्थलों पर भी लागू रहेगा.
दिल्ली शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण नियम और समय सीमा (Table):
| नियम या प्रतिबंध का प्रकार | प्रभावी अवधि / समय सीमा | प्रभावित होने वाले क्षेत्र (Entities) | छूट या विशेष रियायत |
| बाहरी वाहनों की नो-एंट्री | 1 नवंबर से 31 जनवरी तक | दिल्ली के बाहर के गैर-बीएस6 वाहन | इलेक्ट्रिक, सीएनजी, एम्बुलेंस और पुलिस गाड़ियां |
| पार्किंग फीस में बढ़ोतरी | 1 नवंबर से 28 फरवरी तक | सभी अधिकृत नगर निगम पार्किंग स्थल | दिल्ली मेट्रो (DMRC) के पार्किंग स्थल |
| वर्क फ्रॉम होम नियम | 1 नवंबर से 31 जनवरी तक | सभी सरकारी और निजी कार्यालय | 50 प्रतिशत कर्मचारियों को दफ्तर आने की अनुमति |
| धूल नियंत्रण प्रणाली | 15 अगस्त तक लगाना अनिवार्य | 3000 वर्गमीटर से बड़े मॉल, होटल, इमारतें | 1000 वर्गमीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर भी जरूरी |
निष्कर्ष:
दिल्ली सरकार का यह नया विंटर एक्शन प्लान बेहद कड़ा है, जो सर्दियों में राजधानी को गैस चैंबर बनने से रोकने के लिए समय से पहले उठाया गया एक बड़ा कदम है. गाड़ियों पर पाबंदी, वर्क फ्रॉम होम और पार्किंग फीस में बढ़ोतरी जैसे स्थायी उपायों से निश्चित रूप से आम जनता को थोड़ी परेशानी होगी, लेकिन दिल्ली की हवा को सांस लेने योग्य बनाए रखने के लिए इन कड़े नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.