परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें:

  • दिल्ली को किशाऊ बांध से 372 एमजीडी, रेणुकाजी बांध से 275 एमजीडी और लखवार बांध से 216 एमजीडी पानी आवंटित किया जाएगा.
  • इन तीनों बड़ी बांध परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने के बाद दिल्ली को कुल मिलाकर 863 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलने लगेगा.
  • वर्तमान में दिल्ली को रोजाना 1250 एमजीडी पानी की जरूरत है, जिसके मुकाबले अभी सिर्फ 1000 एमजीडी पानी ही मिल पाता है.
  • भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2031 तक दिल्ली में पानी की मांग बढ़कर 1746 एमजीडी हो जाएगी.
  • यह तीनों बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यमुना नदी और उसकी दो प्रमुख सहायक नदियों, टोंस और गिरी पर बनाए जा रहे हैं.

Delhi Water Crisis: अपनी पानी की जरूरतों के लिए हमेशा दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने वाली दिल्ली के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है. किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच आखिरकार एक महत्वपूर्ण सहमति बन गई है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब दिल्ली को अकेले किशाऊ बांध से लगभग 372 मिलियन गैलन प्रति दिन (एमजीडी) पानी मिल सकेगा. इस समझौते से राजधानी में लंबे समय से चली आ रही पानी की किल्लत को हमेशा के लिए दूर करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी. सभी छह राज्य अब इस परियोजना के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गए हैं, जिससे काम में तेजी आएगी.

दिल्ली में इस समय पानी की भारी कमी

वर्तमान समय में दिल्ली के नागरिकों की प्यास बुझाने के लिए हर दिन लगभग 1250 एमजीडी पानी की सख्त जरूरत होती है. इस भारी मांग के मुकाबले दिल्ली को इस समय केवल एक हजार एमजीडी पानी ही मिल पा रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि जरूरत से लगभग 22 प्रतिशत कम पानी उपलब्ध है. आने वाले सालों में आबादी बढ़ने के साथ पानी की यह मांग और ज्यादा बढ़ने वाली है. एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2031 तक दिल्ली में पानी की रोजाना मांग बढ़कर 1746 एमजीडी हो जाने की उम्मीद है. इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए ही दिल्ली सरकार काफी समय से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में चल रहे बांध प्रोजेक्ट्स के पूरा होने का इंतजार कर रही थी.

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कहां से कितना मिलेगा पानी?

दिल्ली को पानी संकट से उबारने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यमुना और उसकी दो सहायक नदियों, टोंस और गिरी पर तीन बड़ी परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है. इसमें उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल के सिरमौर में टोंस नदी पर किशाऊ बांध, देहरादून में यमुना पर लखवार बांध और सिरमौर में गिरी नदी पर रेणुकाजी बांध शामिल हैं. वर्ष 1994 के यमुना जल बंटवारा समझौते के आधार पर इन परियोजनाओं का पानी सभी छह राज्यों में बटना है. लखवार के लिए 2018 और रेणुकाजी के लिए 2019 में समझौता हुआ था. इन तीनों प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर रेणुकाजी से 275 एमजीडी, लखवार से 216 एमजीडी और किशाऊ से 372 एमजीडी पानी मिलेगा, जिससे दिल्ली को कुल 863 एमजीडी अतिरिक्त पानी हासिल होगा.

यमुना को स्वच्छ और अविरल बनाने में मिलेगी मदद

इन तीनों बांध परियोजनाओं के पूरी तरह तैयार हो जाने से न सिर्फ दिल्ली के घरों में पानी की सप्लाई सुधरेगी, बल्कि मैली हो चुकी यमुना नदी को नया जीवन और अविरल बनाने में भी बड़ी मदद मिलेगी. फिलहाल हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से मानसून के महीनों को छोड़कर बाकी दिनों में सिर्फ 320 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता है. नदी में पानी का बहाव बहुत कम होने की वजह से दिल्ली में यमुना का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार यमुना को साफ और सदाबहार बनाए रखने के लिए कम से कम साढ़े आठ सौ क्यूसेक पानी छोड़ना जरूरी है. इन तीनों बांधों के चालू होने के बाद पानी का यह संकट दूर हो जाएगा और दिल्ली को अगले 25 वर्षों तक पानी की कोई टेंशन नहीं रहेगी.

परियोजना के बड़े फायदे और बदलाव:

  • अगले 25 साल की सुरक्षा: इस मेगा प्लान के जमीन पर उतरने के बाद दिल्ली के नागरिकों को अगले 25 सालों तक पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.
  • राज्यों के बीच आपसी तालमेल: पानी के बंटवारे को लेकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच विवाद खत्म होकर सहमति बनी है.
  • यमुना नदी का कायाकल्प: इन बांधों के बनने से यमुना नदी में पानी का बहाव बढ़ेगा, जिससे नदी का बढ़ता प्रदूषण कम होगा और वह स्वच्छ व अविरल बनेगी.
  • मांग और सप्लाई का अंतर खत्म: दिल्ली में वर्तमान में चल रही पानी की 22 प्रतिशत की भारी कमी को इन परियोजनाओं के जरिए पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा.
  • बरसों पुराना इंतजार खत्म: किशाऊ बांध को लेकर लंबे समय से लटके समझौते पर सभी छह राज्यों के राजी होने से इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरे होने का रास्ता साफ हो गया है.