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Delhi Pollution: राजधानी की हवा हुई जहरीली, लग सकता है ग्रैप-2, जानिए किन चीजों पर रहेगा बैन

Delhi pollution: दिल्ली में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही दवा में जहर घुलना शुरू हो जाता है। इसके लिए पहले ही दिल्ली-एनसीआर में GRAP-1 लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही दिल्ली में ग्रैप-2 लागू किया जा सकता है।

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Delhi pollution: दशहरे के बाद से दिल्ली का AQI स्तर खराब श्रेणी में पहुंच गया है। इसके लिए तीन दिन पहले दिल्ली-NCR में ग्रैप-1 लागू किया गया। इसमें कई चीजों पर पाबंदी लगाई गई। फिर से दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब हुई है जिसके चलते जल्द ही GRAP-2 लगाया जा सकता है। GRAP-2 लागू होता है तो उसमें डीजल जेनरेटरों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है। GRAP-1,2,3 और अलग-अलग स्थितियों में लागू किया जाता है।

कितना रहा दिल्ली का AQI?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली में AQI 285 तक पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद का 148, गाजियाबाद का 252, ग्रेटर नोएडा का 248, गुरुग्राम का 178 और नोएडा का 242 दर्ज किया गया। 11 जगह ऐसा थी जहां पर प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा खराब रहा। जिसमें विवेक विहार AQI 332, शादीपुर 338, पंजाबी बाग 321, पटपड़गंज 352, नरेला 315, मुंडका 383, जहांगीरपुरी 352, द्वारका सेक्टर-8 316, बुराड़ी क्रॉसिंग 336, बवाना 314 और अशोक विहार में 305 AQI दर्ज किया गया।

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GRAP-2 में किन चीजों पर रहेगी पाबंदी?

GRAP-2 लागू होने के बाद प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस में बढ़ोतरी की जाएगी। इस दौरान सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो की सर्विस को बढ़ा दिया जाएगा। प्रदूषण कम हो इसके लिए RWA अपने सिक्योरिटी गार्ड को हीटर देगा। गार्ड इसका इस्तेमाल करेंगा तो वह कूड़ा, लकड़ी या कोयला नहीं जलाएगा, जिससे प्रदूषण नहीं बढ़ेगा। डीजल जेनरेटर पर पाबंदी लगाई जाएगी। इस दौरान केवल नेचुरल गैस, बायो गैस, एलपीजी से चलने वाले जेनरेटर ही चला सकते हैं। 800kwa से ज्यादा क्षमता वाले जेनरेटर को केवल रेट्रोफिटिंग के दौरान ही चलाए जाएंगे।

कब-कब लागू होता है GRAP?

दिल्ली और उसके आसपास की हवा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए ग्रेप के चार चरण बनाए गए हैं। इसमें ग्रेप-1 तब लगाया जाता है जब हवा की गुणवत्ता (AQI) 201 से 300 यानी खराब स्थिति में पहुंच जाती है। ग्रेप-2 को लागू तब किया जाता है जब एक्यूआई 301 से 400 तक पहुंच जाता है। हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब होने (एक्यूआई 401 से 450) पर ग्रेप-3 और एक्यूआई 450 से ज्यादा होने पर ग्रेप-4 लागू किया जाता है। इस दौरान ऐसी चीजों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई जाती है जिससे हवा में प्रदूषण न फैले।

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लेखक के बारे में

Shabnaz

शबनाज़ खानम एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो वर्तमान में न्यूज़24 में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने इंडिया डेली लाइव, ज़ी न्यूज़ सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में विभिन्न पदों पर ज़िम्मेदारियां निभाई हैं। शबनाज़ ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। उन्हें डिजिटल और टीवी दोनों में काम करने का 5 साल का अनुभव प्राप्त है और वे अपने संपादन कौशल, बारीक नज़र और विस्तृत कहानी को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। काम के अलावा, उन्हें सिनेमा और लाइफस्टाइल पर बातचीत करना बेहद पसंद है, जो उनकी कहानी कहने की गहरी रुचि को दर्शाता है।
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