Delhi-NCR Earthquake की तीव्रता कम, पर झटके तेज क्यों? कहीं वजह ये तो नहीं...

Delhi-NCR Earthquake: दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटकों से धरती हिल उठी। ये इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर आ गए। हालांकि तीव्रता बहुत ज्यादा नहीं थी फिर सवाल ये उठता है कि झटके इतने तेज क्यों थे। आइए जानते हैं शॉकिंग वजह…

Delhi-NCR Earthquake

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Delhi-NCR Earthquake: 17 फरवरी की सुबह भूकंप के तेज झटकों से पूरी दिल्ली-एनसीआर हिल गई। झटके इतने तेज थे कि लोगों में दहशत का माहौल देखने को मिला। सभी अपनी घरों और बिल्डिंगों से जान बचाने के लिए बाहर निकल आए। घबराहट और डर सभी के चेहरों पर साफ नजर आ रहा था। हालांकि भूकंप की तीव्रता बहुत तेज नहीं थी, लेकिन झटके इतने तेज थे कि सो रहे लोगों के बेड हिलने लगे। दरवाजे खिड़की बजने लगे, जिसे देख ऐसा लग रहा था कि तीव्रता काफी तेज है। अब इसके पीछे की वजह क्या है ये भी जान लेते हैं।

कितनी थी दिल्ली-एनसीआर में आए भूकंप की तीव्रता

दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह करीब 5 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। हालांकि तीव्रता की बात करें तो ऑफिशियली बताया गया की वो 4 रिएक्टर स्केल की तीव्रता से भूकंप आया। अब सवाल ये उठता है कि जब तीव्रता इतनी कम थी तो झटके इतने तेज क्यों थे। इस सवाल का जवाब आप भी ढूंढ रहे हैं तो चलिए आप हम बता देते हैं।

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क्यों थे इतनी तेज झटके जानें वजह?

हालांकि दिल्ली-एनसीआर में आए भूकंप की तीव्रता 3 रिक्टर स्केल का था। लेकिन इसके झटके बहुत ही तेज थे। इसके पीछे की वजह थी उसका केंद्र जो दिल्ली में ही था। जान लें कि भूकंप का केंद्र दिल्ली के धौला कुआं के पास दुर्गाबाई देशमुख कॉलेज के पास था। ये धरती के 5 किलोमीटर नीचे था, जिस वजह से भूकंप के झटके इतने तेज महसूस हुए।

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डर से दहला दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटकों से पूरा दिल्ली-एनसीआर हिल उठा। लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए, सड़कों पर पब्लिक की भीड़ जमा हो गई। दिल्ली-एनसीआर के बाद बिहार और आसपास के क्षेत्रों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि बिहार में भी 4 रिक्टर स्केल की तीव्रता से भूकंप आया और उसका केंद्र सिवान बताया जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

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वैज्ञानिकों ने बताई कंपन की वजह

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, जब भूकंप आता है तो उस दौरान जमीन में कंपन होती है। ऐसे में छोटी अवधि की भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं जो हवा तक पहुंचती हैं और ध्वनि तरंगें बन जाती हैं। भूकंप से उत्पन्न पहली तरंगें P तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की तरह होती हैं और वायुमंडल में कंपन पैदा कर सकती हैं।

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