मुख्य बिंदु

  • दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर 'अर्पण केंद्र' जल्द ही काम करना शुरू करेंगे.
  • नागरिक रोजाना सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच पुराने कपड़े दान कर सकते हैं.
  • पहनने लायक कपड़ों को सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स की तरफ से अपसाइकिल जाएगा.
  • यूज न हो सकने वाले कपड़ों को धागे, फैब्रिक और टेक्सटाइल मटीरियल में रीसाइकिल किया जाएगा.
  • QR कोड के जरिए रजिस्टर करने के बाद दान करने वालों को एक डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा.

Delhi Metro Introduces Arpan Kendras: दिल्ली सरकार ने लोगों को पुराने कपड़े दान करने और सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए 'अर्पण केंद्र' नाम की एक नई पहल शुरू की है. इस प्रोग्राम के तहत, दिल्ली मेट्रो के 10 बड़े स्टेशंस पर कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे, जहां लोग इस्तेमाल किए गए कपड़े फेंकने के बजाय रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के लिए जमा कर सकते हैं.

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क्यों लाई गई ये पहल?

इस पहल का मकसद टेक्सटाइल वेस्ट को कम करना, दोबारा इस्तेमाल होने लायक चीजों को लैंडफिल में जाने से रोकना और राजधानी में एनवायरनमेंट फ्रेंडली तरीकों को बढ़ावा देना है. इससे सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के मौके भी पैदा होने की उम्मीद है.

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इन संस्थाओं की मदद से होगा काम

इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, DMRC लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन (SULM) और टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग ऑर्गनाइजेशन 'क्लॉथ्स बॉक्स फाउंडेशन' और 'रेस्पन' के बीच एक MoU पर साइन किए गए. ये समझौता दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता की मौजूदगी में किया गया.

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किन स्टेशंस पर दान करें कपड़े?

प्रोग्राम के पहले स्टेशन में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग के मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे. डोनेशन सेंटर रोजाना सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुले रहेंगे.

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डोनेट किए गए कपड़ों का क्या होगा?

जमा किए जाने के बाद, दान किए गए कपड़ों को ध्यान से छांटा जाएगा. पहनने लायक कपड़ों को महिलाओं की लीडरशिप वाले सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स की तरफ से शॉपिंग बैग, सजावटी सामान और दोबारा इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों में बदला जाएगा. जिन कपड़ों का दोबारा यूज नहीं हो सकता, उन्हें साइंटिफिक तरीके से धागे, कपड़े और टेक्सटाइल के दूसरे कच्चे माल में रीसायकल किया जाएगा.

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महिलाओं को मिलेगा रोजगार

स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन के तहत काम करने वाली महिलाएं टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग की खास ट्रेनिंग लेने के बाद 'अर्पण केंद्रों' को संभालेंगी. टेक्निकल सपोर्ट, छंटाई और रीसाइक्लिंग का काम 'क्लॉथ्स बॉक्स फाउंडेशन' और 'रेस्पन' संभालेंगे, जबकि DMRC कियोस्क और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर अवेलेबल कराएगा.

डिजिटल डोनेशन भी अवेलेबल

डोनेशन प्रॉसेस को ट्रांसपेरेंट और आसान बनाने के लिए, दान करने वाले हर सेंटर पर मौजूद QR कोड को स्कैन करके अपना डोनेशन डिजिटल तरीके से रजिस्टर कर सकते हैं. बुनियादी जानकारी देने के बाद, दान करने वालों को एक डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा. अधिकारी हर मेट्रो स्टेशन से जुड़े सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए कलेक्शन पर नजर भी रखेंगे.

एनवायरनमेंट फ्रेंडली काम

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि ये पहल पर्यावरण संरक्षण, वेस्ट में कमी और महिलाओं के सशक्तिकरण को एक साथ लाती है. उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद फ्यूचर में दिल्ली के और मेट्रो स्टेशनों तक इस प्रोग्राम को बढ़ाना है, साथ ही टेक्सटाइल वेस्ट को मैनेज करने के लिए साइंटिफिक को बढ़ावा देना है.

निष्कर्ष

'अर्पण केंद्र' इनिशिएटिव लोगों को पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय दान करने के लिए एनकरेज करके दिल्ली में सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंटकी दिशा में एक अहम कदम है. ये प्रोग्राम न सिर्फ टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग को सपोर्ट करता है, बल्कि सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के जरिए महिलाओं के लिए रोजगार के मौके भी पैदा करता है. डिजिटल ट्रैकिंग, पारदर्शी कामकाज और सरकारी एजेंसियों और रीसाइक्लिंग संगठनों के बीच साझेदारी के साथ, इस प्रोजेक्ट का मकसद लैंडफिल में जाने वाले कचरे को कम करना और एक साफ-सुथरा, हरा-भरा शहर बनाना है. अधिकारियों का प्लान फ्यूचर में इस पहल को और जगहों तक बढ़ाने का भी है.