दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी आग में जिस अग्रवाल परिवार ने अपने आठ सदस्य खो दिए थे, अब उस परिवार में एक भी सदस्य जिंदा नहीं बचा है. होटल में आग के बाद परिवार के एकमात्र जीवित सदस्य 80 साल के राधे श्याम अग्रवाल थे, उनका भी मंगलवार को निधन हो गया. इस मौत के साथ ही हंसते-खेलते अग्रवाल परिवार का कोई भी सदस्य अब इस दुनिया में जीवित नहीं बचा है.
राधेश्याम की वजह से ही होटल में रुका था परिवार
80 वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल सांस की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और साकेत के मैक्स अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे. गुरुग्राम के सेक्टर 46 में रहने वाला उनका परिवार सिर्फ इसलिए दिल्ली आया था, ताकि वे अपने बुजुर्ग मुखिया की देखभाल कर सकें. गुरुग्राम से रोज साकेत आना-जाना और दिल्ली के ट्रैफिक से बचने के लिए राधेश्याम के बेटे विवेक अग्रवाल ने अस्पताल से कुछ ही सौ मीटर की दूरी पर स्थित 'फ्लरिश इन' नाम के एक होटल में रुकने का फैसला किया था. उन्हें क्या मालूम था कि बुजुर्ग पिता की सहूलियत के लिए लिया गया यह फैसला पूरे परिवार के लिए काल बन जाएगा.
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आखिरी वक्त तक हादसे से अनजान रहे दादा
इस पूरी त्रासदी में सबसे भावुक कर देने वाला पहलू राधेश्याम अग्रवाल की पोती जीविषा से जुड़ा है. जीविषा बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी. जब उसे पता चला कि दादाजी की तबीयत बहुत नाजुक है और डॉक्टरों ने परिवार को सबसे बुरे वक्त के लिए तैयार रहने को कहा है, तो वह तुरंत फ्लाइट पकड़कर दिल्ली आ गई ताकि वह अपने दादाजी को आखिरी बार देख सके. जीविषा के आने से राधेश्याम अग्रवाल इतने खुश थे कि उन्होंने आईसीयू में तैनात नर्सों से गर्व के साथ कहा था, 'देखो, मेरी पोती इतनी दूर बेंगलुरु से खास मुझसे मिलने आई है.'
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दादा से मिलने जाने के चंद घंटे पहले ही होटल में आग लग गई और जीविषा खुद हमेशा के लिए विदा हो गई.
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पिछले एक हफ्ते से राधेश्याम अग्रवाल अस्पताल के बेड पर लेटे-लेटे बार-बार पूछ रहे थे कि परिवार का कोई सदस्य उनसे मिलने क्यों नहीं आ रहा. लेकिन डॉक्टरों और दूर के रिश्तेदारों ने उन्हें इस खौफनाक सच से पूरी तरह अनजान रखा कि उनका पूरा संसार अस्पताल से कुछ ही दूरी पर जलकर खाक हो चुका है.
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एक झटके में उजड़ गया पूरा संसार
पिछले हफ्ते 'फ्लरिश इन' होटल में अचानक लगी भीषण आग ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया. इस अग्निकांड में अग्रवाल परिवार के जो 8 लोग जिंदा जल गए थे, उनमें राधेश्याम अग्रवाल के बेटे विवेक अग्रवाल, पत्नी प्रेम लता अग्रवाल, विवेक की पत्नी तर्जनी अग्रवाल, विवेक की बड़ी बेटी जीविषा अग्रवाल, विवेक की छोटी बेटी वर्या अग्रवाल और तीन अन्य करीबी रिश्तेदार शामिल थे.
गुरुग्राम के उस घर में पसरा सन्नाटा
इस दर्दनाक अंत ने अग्रवाल परिवार के गुरुग्राम सेक्टर 46 स्थित आलीशान घर को हमेशा के लिए सूना कर दिया है. उस घर की दीवारों में कभी बच्चों की हंसी, बड़ों की बातचीत और एक भरे-पूरे परिवार की सांसें गूंजती थीं. लेकिन आज वहां सन्नाटा पसरा है.