दिल्ली हाईकोर्ट में आज से दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव के दौरान हिंसा मामले में दायर याचिका पर सुनवाई फिर से शुरू हुई है. आज सुनवाई के दौरान बेंच ने छात्र संघ चुनाव संबंधी गुंडागर्दी, वाहन नियमों के उल्लंघन और शिक्षकों के खिलाफ हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी पर सवाल उठाए. बेंच ने यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों को चेतावनी भी दी कि अगर चुनाव प्रचार के नियमों का उल्लंघन किया तो हर्जाना लगाया जा सकता है. वहीं ASG ने बेंच को बताया कि मामले में दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी गई है.
बेंच ने तस्वीरें दिखाकर पुलिस-यूनिवर्सिटी से सवाल पूछे
मामले की सुनवाई कर रही हाईकोर्ट बेंच ने DCP से सवाल किया कि नॉर्थ कैंपस में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को आने की इजाजत क्यों दी गई, कैसे दी गई और क्यों दी? इसके लिए बेंच ने कुछ तस्वीरों का हवाला दिया, जिनमें 10-20 कारों का ग्रुप नजर आया, जिनकी छतों और बोनट पर लोग खड़े थे और वे चुनाव उम्मीदवारों की तस्वीरों हाथों में लिए हुए थे. बेंच ने कहा कि यह गुंडागर्दी नहीं है तो क्या है? चुनाव प्रचार के नियमों का उल्लंघन हुआ, स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद वे रोके क्यों नहीं गए? इस तरह का प्रचार उम्मीदवारों और छात्रों के बीच भय का माहौल बनाता है.
हाईकोर्ट ने पुलिस और छात्र संगठनों को फटकार लगाई
बता दें कि साल 2017 में वकील प्रशांत मनचंदा के द्वारा याचिका दायर की गई थी. चुनाव प्रचार के दौरान हिंसात्मक रवैया अपनाते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. इसके आरोपी DUSU चुनाव उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. बेंच ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और छात्र संगठनों को फटकार लगाई. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजा कारिया की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की. बेंच ने चुनाव पर रोक नहीं लगाई या उन्हें स्थगित नहीं किया, लेकिन स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की बेंच के सामने दलीलें
अदालत ने बेंच को चेतावनी दी है कि अगर रिपोर्ट ने संतुष्ट नहीं किया तो मतगणना रोकने और चुनाव परिणामों को स्थगित करने का आदेश पारित किया जा सकता है. कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा. अगर आप स्थिति को नियंत्रित करने में असमर्थ हैं तो हम जानते हैं कि इसे कैसे करना है. वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बेंच को बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान 998 चालान काटे गए और 30 कारों को जब्त किया गया. बिना लाइसेंस के वाहन चलाने वालों के 547 चालान किए गए और 49 वाहनों का रिकॉर्ड जब्त किया गया. 6 FIR दर्ज करके 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था.
छात्र संगठनों को हाईकोर्ट का कारण बताओ नोटिस
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एक छात्र को निष्कासित भी किया गया है. तस्वीरों में दिख रहे लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं. इन दलीलों के जवाब में सवाल उठाते हुए बेंच ने पूछा कि इस तरह के उल्लंघन पहले क्यों नहीं पकड़े गए? क्या वाहनों की जांच करना पुलिस के काम का हिस्सा नहीं था? बेंच ने DUSU और कॉलेज में पदों के लिए चुनाव लड़ रहे सभी 114 उम्मीदवारों, छात्र संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के लिए कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए या हर्जाना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए.
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