गर्मियों के इस मौसम में जब लोग दिन-रात एयर कंडीशनर और कूलर चलाकर राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक उसी वक्त राजधानी दिल्ली के लाखों परिवारों को बिजली के बिल का एक नया झटका लगा है. सरकार की तरफ से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, अब उन लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी जो हर महीने सीमित दायरे से बाहर जाकर बिजली का इस्तेमाल करते हैं. दिल्ली की सड़कों, दफ्तरों और चाय की दुकानों पर आजकल बस इसी बात की चर्चा है कि अगले महीने से आने वाला बिजली का बिल बजट बिगाड़ सकता है. आइए जानते हैं इस बड़े बदलाव से किन लोगों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी?

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क्या है पीपीएसी (PPAC) का नया नियम?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पीपीएसी आखिर होता क्या है? बता दें कि बिजली बिल में होने वाली इस बढ़ोतरी की असली वजह 'पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट' यानी पीपीएसी (PPAC) शुल्क में किया गया बदलाव है. आसान शब्दों में कहें तो जब बिजली कंपनियों को बाहर से बिजली खरीदने के लिए कोयला या गैस जैसी ईंधन सामग्री महंगी मिलती है, तो वे उस बढ़ी हुई कीमत को इस शुल्क के जरिए ग्राहकों के बिल में जोड़ देती हैं. वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय कारणों से इस बार बिजली कंपनियों के लिए खरीद लागत करीब 31 प्रतिशत तक बढ़ गई थी. ऐसे में इस बोझ को कम करने के लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने पीपीएसी की पुरानी सीमा को 14.5 प्रतिशत से बढ़ाकर अब लगभग 17.5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे सीधे तौर पर कुल बिल में करीब 3 फीसदी का इजाफा देखने को मिलेगा.

किसको मिलेगी पूरी राहत और किन इलाकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

इस पूरे फैसले का असर दिल्ली के हर नागरिक पर एक समान नहीं होने वाला है. दिल्ली सरकार में ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को साफ कर दिया है कि जो लोग बेहद सावधानी से बिजली खर्च करते हैं, उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है. आइए पोइंट्स में समझते हैं कि यह नया नियम किस उपभोक्ता पर कैसा असर डालेगा:

  • 200 यूनिट तक वाले पूरी तरह सुरक्षित: जो परिवार हर महीने 200 यूनिट या उससे कम बिजली की खपत करते हैं, उन्हें दिल्ली सरकार की तरफ से 100% सब्सिडी मिलती रहेगी और उनका बिल पहले की तरह ही 'शून्य' आएगा.
  • 400 यूनिट तक मामूली बदलाव: 201 से 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को सरकार की तरफ से लगभग 850 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जिसकी वजह से इस वर्ग पर भी कोई बड़ा वित्तीय संकट नहीं आएगा. लेकिन बिल हल्का सा बढ़कर जरूर आएगा.
  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली पर सबसे ज्यादा मार: इस नए टैरिफ ऑर्डर के कारण बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) के ग्राहकों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा.
  • अन्य कंपनियों के ग्राहकों का हाल: इसके अलावा बीएसईएस यमुना (BYPL) के क्षेत्र में यह शुल्क 17.43% और टाटा पावर (TPDDL) के इलाके में इसे 16% तय किया गया है.

ऊर्जा मंत्री आशीष सूद का कहना है कि सरकार ने पूरा प्रयास किया है कि लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े. उनके प्रयासों से पीपीएसी में औसतन लगभग 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि बिजली कंपनियों को 31 फीसदी महंगी बिजली मिल रही है.

पांच सालों की बढ़ी लागत का असर

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि आखिरी बार बिजली की दरों का मुख्य ढांचा सितंबर 2021 में तय किया गया था. पिछले लगभग पांच सालों के दौरान बिजली उत्पादन की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसे अब इस चरणबद्ध तरीके से एडजस्ट किया जा रहा है. बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की मांग तो बहुत ज्यादा थी और अगर सरकार बीच में दखल नहीं देती, तो दिल्ली के आम परिवारों पर सीधे 31 फीसदी तक का भारी-भरकम बोझ आ सकता था. लेकिन समय पर किए गए प्रशासनिक प्रयासों की बदौलत उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वास्तविक असर को सिर्फ 2.4 प्रतिशत के तक ही सीमित रखा गया है.

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