मुख्य जानकारी:
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पूर्वी दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में 4 अलग-अलग स्पीड लिमिट के बोर्ड लगे हैं.
- शास्त्री पार्क में कार की लिमिट 80 KM/H है, जो कश्मीरी गेट पर 85, गांधी नगर में 70 और गीता कॉलोनी में 100 KM/H हो जाती है.
- इस एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक का सफर अब मात्र 2.5 से 3 घंटे में पूरा हो सकेगा.
- राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के पास वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 1200 करोड़ की लागत से एशिया का सबसे लंबा कॉरिडोर बना है.
- विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेसवे को पूरी तरह शुरू करने से पहले भ्रम दूर करने के लिए सभी साइन बोर्ड एक समान होने चाहिए.
Delhi Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा इन दिनों अलग-अलग स्पीड लिमिट वाले साइन बोर्ड की वजह से भारी चर्चा और विवादों में बना हुआ है. पूर्वी दिल्ली के अंतर्गत आने वाले महज 4 किलोमीटर के छोटे से दायरे में कई जगहों पर अलग-अलग गति सीमा लिखे होने से वाहन चालक बुरी तरह भ्रमित हो रहे हैं. इस बेहद आधुनिक एक्सप्रेसवे पर भजनपुरा से गीता कॉलोनी के बीच केवल 4 किलोमीटर की दूरी में 4 अलग-अलग गति सीमा के बोर्ड लगा दिए गए हैं. स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि एक ही एक्सप्रेसवे पर बार-बार अचानक बदलती स्पीड लिमिट से भारी सड़क दुर्घटनाओं और चालान कटने का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है.
4 अलग-अलग स्थानों पर स्पीड लिमिट
इस मार्ग पर यात्रा करते समय चालकों को भारी भ्रम का सामना करना पड़ रहा है. सबसे पहले शास्त्री पार्क-उस्मानपुर के पास कारों के लिए अधिकतम 80 KM/H और भारी वाहनों के लिए 60 KM/H की सीमा तय की गई है. थोड़ा आगे बढ़ते ही कश्मीरी गेट फ्लाईओवर के पास यह बदलकर कारों के लिए 85 KM/H और भारी वाहनों के लिए 65 KM/H हो जाती है. इसके बाद गांधी नगर मार्केट के पास कारों के लिए 70 KM/H और भारी वाहनों के लिए 60 KM/H की लिमिट दिखती है. वहीं गीता कॉलोनी श्मशान घाट के पास कारों के लिए अधिकतम 100 KM/H और भारी वाहनों के लिए 80 KM/H की सीमा लिखी हुई है.
एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
यातायात और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर चालकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट और एक समान स्पीड लिमिट का होना सबसे अनिवार्य शर्त है. यदि महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर अलग-अलग गति सीमा दिखाने वाले संकेतक लगे होंगे, तो वाहन चालक भ्रम के कारण अचानक ब्रेक लगाने या अचानक स्पीड बढ़ाने के लिए मजबूर हो जाएंगे. दिल्ली से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले इन मार्गों पर गाड़ियां बहुत तेज रफ्तार से चलती हैं, ऐसे में अस्पष्ट और विरोधाभासी साइन बोर्ड के कारण पीछे से आने वाले वाहनों के आपस में टकराने की आशंका बहुत बढ़ जाती है.
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की खासियतें क्या हैं?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश की राजधानी दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर सहारनपुर के रास्ते उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक जाता है. इस पूरे एक्सप्रेसवे मार्ग पर सुगम यातायात के लिए 16 एंट्री-एक्ज़िट पॉइंट, 113 अंडरपास और 5 बड़े रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं. उत्तराखंड के मोहंड क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर करीब 12 किलोमीटर लंबा एक शानदार एलिवेटेड सेक्शन तैयार किया गया है. इसके साथ ही डाटकाली इलाके में पहाड़ों को काटकर 340 मीटर लंबी एक आधुनिक सुरंग (Tunnel) भी बनाई गई है जो इस सफर को बेहद सुहाना और तकनीकी रूप से उन्नत बनाती है.
कॉरिडोर चालू होने से यात्रा के समय में कितनी कमी आएगी?
इस नए और भव्य एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरी बेहद सिमट जाएगी. पहले जहां दिल्ली से देहरादून जाने में कई घंटों का लंबा समय लगता था, वहीं अब यह सफर मात्र 2.5 से 3 घंटे में आसानी से पूरा किया जा सकेगा. इस एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग पर कारों के लिए आधिकारिक रूप से अधिकतम 100 KM/H और भारी कमर्शियल वाहनों के लिए 80 KM/H की गति सीमा निर्धारित की गई है. सफर के समय में होने वाली इस भारी कमी से दैनिक यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी.
बेहतर रोड कनेक्टिविटी से क्या फायदे मिलेंगे?
इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बूस्ट मिलने की उम्मीद है. दिल्ली-एनसीआर से हर महीने हजारों की संख्या में लोग अपनी निजी कारों से देहरादून, मसूरी, धनौल्टी, कनाताल और चकराता जैसे खूबसूरत पर्वतीय स्थलों की सैर करने के लिए निकलते हैं. देहरादून पहुंचने के बाद प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी केवल 30 किलोमीटर, धनौल्टी लगभग 60 किलोमीटर और कनाताल सिर्फ 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल पर्यटकों का सफर आरामदायक होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे 4 किमी के दायरे का गति सीमा विवरण:
| स्थान का नाम (Entities) | कारों के लिए स्पीड लिमिट | भारी वाहनों के लिए स्पीड लिमिट | चालकों के लिए मुख्य समस्या |
| शास्त्री पार्क - उस्मानपुर | 80 KM/H | 60 KM/H | अचानक गति कम करने का दबाव |
| कश्मीरी गेट फ्लाईओवर | 85 KM/H | 65 KM/H | गति सीमा में अचानक 5 किमी का बदलाव |
| गांधी नगर मार्केट | 70 KM/H | 60 KM/H | मार्केट के पास सबसे कम स्पीड लिमिट |
| गीता कॉलोनी श्मशान घाट | 100 KM/H | 80 KM/H | आधिकारिक अधिकतम स्पीड लिमिट बोर्ड |
निष्कर्ष:
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे निसंदेह पर्यटन और व्यापार के लिहाज से एक गेम चेंजर प्रोजेक्ट है, लेकिन मात्र 4 किलोमीटर में 4 अलग-अलग स्पीड लिमिट के बोर्ड प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाते हैं. सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने और ड्राइवरों का भ्रम दूर करने के लिए प्रशासन को तुरंत सभी साइन बोर्ड एक समान और स्पष्ट करने की आवश्यकता है.