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दिल्ली के 190 पार्क 'हाई रिस्क' घोषित, सिर्फ 16 में CCTV कैमरे; सुरक्षा ऑडिट में बड़ा खुलासा

कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से हुई दरिंदगी के बाद डीडीए ने अपने 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा किया है. जांच रिपोर्ट में 190 पार्कों को बेहद संवेदनशील यानी ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि 520 पार्कों में रोशनी की भारी कमी पाई गई. केवल 16 पार्कों में ही सीसीटीवी लगे हैं, जिसके बाद प्रशासन ने 323 नए पार्कों में कैमरे लगाने और टूटी बाउंड्री सुधारने का काम तेज कर दिया है.

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कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से हुई दरिंदगी के बाद डीडीए ने अपने 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा किया है. CREDIT: facebook ( Dube Om )

दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ चाकू की नोक पर हुए कथित सामूहिक बलात्कार के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है. इस सनसनीखेज वारदात के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 736 पार्कों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया. उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर एक सप्ताह के भीतर पूरे किए गए इस ऑडिट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं.

सर्वेक्षण के तहत डीडीए के 736 पार्कों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें 190 पार्कों को हाई रिस्क जोन में रखा गया है. 258 पार्क मीडियम रिस्क जोन में हैं और 288 पार्क कम रिस्क वाले जोन में हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत 190 हाई-रिस्क पार्कों पर है, जहां तुरंत कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाने हैं.

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रोशनी की कमी और नाममात्र की निगरानी

ऑडिट से साफ हुआ कि पार्कों में निगरानी का ढांचा बेहद कमजोर है. वर्तमान में 736 में से केवल 16 पार्कों में ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. अब एजेंसी ने 323 अतिरिक्त पार्कों में नए कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके अलावा, 520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटों की जरूरत पाई गई. इनमें से 231 पार्कों में प्राथमिकता के आधार पर काम चल रहा है, जबकि 106 पार्कों में लाइटिंग का काम पूरा भी कर लिया गया है.

चारदीवारी और एंट्री गेटों की बदहाली

जांच में 163 पार्कों में गेट और एंट्री कंट्रोल से जुड़ी खामियां मिलीं. इन पार्कों के बिना ताले वाले गेटों को बदलकर लॉक सिस्टम वाले गेट लगाए जा रहे हैं. वहीं, 399 पार्कों में चारदीवारी या ग्रिल टूटी मिली, जिनमें से 233 पार्कों में मरम्मत पूरी हो चुकी है. पार्कों के अंदर बने शौचालयों और पुराने वीरान ढांचों को भी संवेदनशील माना गया है, जहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है. प्रशासन ने 115 पार्कों में सुरक्षा बोर्ड लगा दिए हैं और 484 अन्य जगहों पर साइनेज लगाने की तैयारी है.

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245 पार्कों में रात की गश्त, 134 में होंगे गनमैन

डीडीए ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 245 प्रमुख पार्कों में रात की गश्त शुरू कर दी है. इसके अलावा 134 ऐसे पार्कों की पहचान की गई है जहां हथियारबंद गार्ड (गनमैन) तैनात किए जाएंगे. सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए डीडीए अधिकारियों ने 28 सितंबर को सुरक्षा एजेंसियों के साथ अहम बैठक भी की. गार्डों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए 602 पार्कों में बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली चालू कर दी गई है और बाकी बचे पार्कों में इसे जल्द लागू किया जा रहा है.

पुलिस से सीधा तालमेल और डिजिटल निगरानी

पार्कों में तैनात फील्ड स्टाफ और स्थानीय थानों के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया गया है. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के संपर्क नंबर साझा किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंच सके. सुरक्षा नियमों, गश्त और हाजिरी को लेकर एक सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जा रहा है.

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पूरी व्यवस्था पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीय मास्टर ट्रैकर और मॉनिटरिंग डैशबोर्ड बनाया गया है. साथ ही डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी हर हफ्ते पार्कों का औचक निरीक्षण करेंगे. स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के साथ भी लगातार बैठकें की जा रही हैं.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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