दिल्ली की पुरानी सीवेज समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने एक बड़ा कदम उठाया है. राजधानी के रिहायशी और औद्योगिक इलाकों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए 9 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है. अधिकारियों का दावा है कि 31 अक्टूबर तक इन सभी प्लांटों को आधुनिक मानकों के हिसाब से तैयार कर दिया जाएगा. इस पहल का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी में गिरने वाले फीकल कोलीफॉर्म को पूरी तरह रोकना है. जल बोर्ड का मानना है कि इस समयसीमा के बाद यमुना में जाने वाला पानी पूरी तरह ट्रीटेड होगा जिससे नदी की सेहत में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.
37 में से 28 प्लांट पहले ही हुए आधुनिक
दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार शहर में कुल 37 एसटीपी काम कर रहे हैं जो घरों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को साफ करते हैं. इनमें से 28 प्लांटों को पहले ही अपग्रेड किया जा चुका है और वे वर्तमान में तय मानकों के अनुसार काम कर रहे हैं. इन आधुनिक प्लांटों से निकलने वाले पानी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 230 एमएनपी प्रति 100 एमएल तक सीमित कर दिया गया है जो पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल सही है. बाकी बचे 9 प्लांटों में प्रदूषण का स्तर अभी भी ज्यादा बना हुआ है जिसके कारण वहां तकनीक को सुधारने और मशीनों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
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यमुना विहार और केशोपुर में होगा विस्तार
इस पूरी योजना के तहत यमुना विहार फेज-3 प्लांट की क्षमता को 25 एमजीडी से बढ़ाकर 40 एमजीडी करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा वहां उपलब्ध खाली जमीन पर 15 एमजीडी का एक नया प्लांट भी बनाया जाएगा जिस पर करीब 403 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय तय किया गया है. इसी कड़ी में केशोपुर फेज-1 प्लांट की क्षमता को भी 12 एमजीडी से बढ़ाकर 18 एमजीडी किया जाएगा. इस काम पर लगभग 133 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिससे इलाके के सीवेज सिस्टम को बड़ी मजबूती मिलेगी.
बजट और समयसीमा पर जल बोर्ड का जोर
दिल्ली जल बोर्ड इन प्रोजेक्ट्स के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल दोबारा किया जा सके और यमुना पर बढ़ता बोझ कम हो. इन 9 एसटीपी के अपग्रेड होने से दिल्ली के लाखों लोगों को गंदगी और बदबू की समस्या से राहत मिलेगी. सरकार इस मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि राजधानी का ड्रेनेज सिस्टम दुनिया के बेहतरीन शहरों जैसा बन सके. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि काम की गुणवत्ता और समयसीमा का खास ख्याल रखा जाए. अगर यह योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में यमुना का पानी पहले से कहीं ज्यादा साफ और सुरक्षित नजर आएगा.