दिल्ली में प्रदर्शन के मामले में कोर्ट ने आरोपियों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि आरोपियों ने शांति भंग की और बॉन्ड में तय शर्तों का उल्लंघन किया. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने प्रदर्शन के लिए बाकायदा लोगों को आह्वान किया था. इसी आधार पर दिल्ली पुलिस ने इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की. फिलहाल, कोर्ट ने आरोपियों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया है.
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पेश की मजबूत दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कीं, दिल्ली पुलिस की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा गया कि पुलिस के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका ने भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का दोबारा उल्लंघन किया है. अदालत में दलील देते हुए पुलिस ने दोनों के पिछले आचरण का हवाला दिया और उन्हें ‘रिपीट ऑफेंडर’ करार दिया. पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों ने पहले भरे गए बेल बॉन्ड की शर्तों का सीधा उल्लंघन किया है. इन्हीं दलीलों के आधार पर अदालत ने दोनों को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया.
5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत नहीं दी. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए आशुतोष और सौरभ को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया. अब इस अवधि के दौरान मामले से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी. वहीं, इसी मामले में पकड़े गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अन्य सदस्य अंजिक्य शिंदे को पुलिस ने जरूरी बॉन्ड भरवाने के बाद रिहा कर दिया है.
सीजेपी संस्थापक ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजे जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दोनों का पक्ष लेते हुए पूछा कि आखिर उनका गुनाह क्या था? अभिजीत दिपके ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना.”