केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के बल मुख्यालय में एक प्रेरणादायक और साहित्यिक गरिमा से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें CISF के AIG (प्रशासन) जय प्रकाश आजाद द्वारा लिखित पुस्तक ‘होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन’ का औपचारिक विमोचन CISF महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन द्वारा किया गया. यह अवसर केवल एक पुस्तक के लोकार्पण तक सीमित नहीं था, बल्कि आत्मबल, सकारात्मक सोच और जीवन संघर्षों में विजय के संदेश को समाज तक पहुंचाने का एक प्रेरक क्षण भी बना.
महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की अमर काव्य रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ से प्रेरित यह पुस्तक आधुनिक जीवन की जटिलताओं, मानसिक दबावों, असफलताओं और निराशाओं के बीच व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. पुस्तक में भगवान श्रीराम के संघर्ष, शक्ति साधना और अंततः विजय के प्रसंगों को आधार बनाते हुए यह संदेश दिया गया है कि हर व्यक्ति के भीतर एक ‘पुरुषोत्तम’ छिपा है, जिसे पहचानने और जागृत करने की आवश्यकता है.
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लेखक श्री जय प्रकाश आजाद ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक रामायण का पुनर्लेखन नहीं है, बल्कि श्रीराम के व्यक्तित्व, उनके धैर्य, संघर्षशीलता और कर्मयोग से प्रेरणा लेकर वर्तमान पीढ़ी के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रस्तुत करने का प्रयास है. पुस्तक में जीवन के उन पहलुओं को सरल और संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिनसे आज का युवा प्रतिदिन जूझ रहा है, प्रतिस्पर्धा, आत्मसंदेह, असफलता का भय और मानसिक तनाव.
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पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल आध्यात्मिक या दार्शनिक दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और जीवन संघर्षों को भी बेहद सहजता से शामिल किया गया है. यही कारण है कि यह पुस्तक पाठकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करती है और उन्हें यह महसूस कराती है कि संघर्ष जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई संभावनाओं की शुरुआत है.
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विमोचन अवसर पर CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि ‘होगी जय… हे पुरुषोत्तम नवीन!’ वर्तमान समय में युवाओं और सुरक्षा बलों के कर्मियों के लिए एक अत्यंत प्रेरणादायी मार्गदर्शक सिद्ध होगी. उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण वातावरण में यह पुस्तक व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति पहचानने, सकारात्मक सोच विकसित करने और निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देती है. उन्होंने यह भी कहा कि महाकवि निराला की रचना से प्रेरित यह कृति प्रत्येक व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को जागृत करने की शक्ति रखती है.
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मियों ने भी पुस्तक के विषय, भाषा शैली और उसके सकारात्मक संदेश की सराहना की. सभी ने इसे केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण और आत्मविकास का प्रभावशाली माध्यम बताया. सरल, सहज और प्रेरक शैली में लिखी गई यह पुस्तक युवाओं, विद्यार्थियों, प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों तथा जीवन में दिशा और प्रेरणा की तलाश कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है.
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