CAQM new rules: दिल्ली-एनसीआर में सांसों पर भारी पड़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार के बाद अब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. एनसीआर के आसमान को जहरीले धुएं से बचाने के लिए अब सड़कों पर दौड़ने वाले थ्री-व्हीलर्स के ईंधन को पूरी तरह बदलने की तैयारी हो चुकी है. एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए आयोग ने ऑटो सेक्टर में बड़े बदलाव की घोषणा की है. आयोग की ओर से जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध तरीके से 'ई-3 व्हीलर नीति' लागू की जाएगी, जिसके तहत आने वाले समय में सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (L5 कैटेगरी) का ही नया रजिस्ट्रेशन हो सकेगा. नए नियम के लागू होने के बाद पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले नए ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी.
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा नया नियम
CAQM की नई गाइडलाइन के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है. इस योजना को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा, जिसके लिए समयसीमा तय कर दी गई है. साल 2027 से देश की राजधानी दिल्ली में नए CNG और डीजल थ्री-व्हीलर (ऑटो) का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. साल 2028 से दिल्ली से सटे हाई व्हीकल डेंसिटी (HVD) यानी ज्यादा वाहनों की संख्या वाले जिलों (जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर/नोएडा) में भी सिर्फ ई-3 व्हीलर का ही रजिस्ट्रेशन होगा.
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सिर्फ L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक वाहन होंगे रजिस्टर्ड
आयोग ने साफ किया है कि यह नियम सवारी ढोने वाले ऑटो और मालवाहक थ्री-व्हीलर दोनों पर समान रूप से लागू होगा. इस फैसले के तहत केवल L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स को ही प्राथमिकता दी जाएगी. हाल ही में आई विशेषज्ञों की रिपोर्ट में यह सामने आया था कि दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 (PM2.5) के बढ़ते स्तर और वायु प्रदूषण में गाड़ियों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ा जिम्मेदार है. इसी को देखते हुए जीरो-इमिशन मोबिलिटी की तरफ कदम बढ़ाना जरूरी हो गया था. CAQM के इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर के ऑटो सेक्टर की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है.
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