- फ्लाईओवर की खास बातें
- इस अहम प्रोजेक्ट को करीब 11 साल पहले तत्कालीन अरविंद केजरीवाल सरकार में मंजूरी मिली थी.
- बारापुला फ्लाईओवर की लंबाई महज 3.5 किलोमीटर है, लेकिन इससे कई इलाके के निवासियों को राहत मिलेगी.
- मयूर विहार से एम्स अस्पताल तक पुल से 9 किलोमीटर तक का सफर महज 15 मिनट में पूरा हो जाएगा.
- इस फ्लाइवर के चालू होने से वेस्ट और ईस्ट दिल्ली के बीच सड़क से सफर काफी आसान हो जाएगा.
- अब लोगों को रिंग रोड या नई दिल्ली होकर पश्चिमी दिल्ली से पूर्वी दिल्ली जाना पड़ता है.
Barapullah Phase-III Flyover: दिल्ली के निवासियों का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है, क्योंकि बारापुल्ला फेज-3 फ्लाईओवर प्रोजेक्ट अब अपने आखिरी चरण में है और अधिकारी 30 जून तक इस कॉरिडोर को खोलने की योजना बना रहे हैं. कई सालों की देरी और बार-बार आई रुकावटों के बाद, अब निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो चुका है और वक्त पर काम पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
ट्रैफिक जाम से आजादी!
एक बार चालू हो जाने के बाद, इस नए कॉरिडोर से के मुख्य इलाकों में ट्रैफिक की आवाजाही में काफी सुधार होने की उम्मीद है. यह सराय काले खां, मयूर विहार, NH-24, DND फ्लाईवे और रिंग रोड के बीच बेहतर कनेक्टिविटी देगा, जिससे रोज़ाना सफर करने वाले हज़ारों लोगों का यात्रा का समय कम होगा. इस प्रोजेक्ट में साइकिल के लिए एक अलग लेन और पैदल चलने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं भी होंगी, जिससे यह देश के सबसे ज़्यादा यात्रियों के अनुकूल एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक बन जाएगा.
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सस्टेनेबल डेवलपमेंट
इस प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग की एक बड़ी खासियत यमुना के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) पर बना पुल है. इस स्ट्रक्चर में तकरीबन 125 मीटर के स्पैन हैं; ये डिजाइन इसलिए बनाया गया है ताकि नदी के कुदरती बहाव और आसपास के इकोसिस्टम पर कम से कम असर पड़े.
चैलेंज के बावजूद हुआ काम
साल 2015 में तत्कालीन केजरीवाल सरकार में मंजूरी मिलने के बाद से ही इस फ्लाईओवर के बनने में कई चुनौतियां आईं. जमीन अधिग्रहण की समस्याएं, प्रशासनिक अड़चनें और तकनीकी दिक्कतों के कारण इसमें काफी देरी हुई, जिससे प्रोजेक्ट की समय-सीमा कई साल पीछे चली गई और इसकी कुल लागत भी बढ़ गई. एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने भी इस लंबी देरी के कारणों की जांच की थी.
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होगा जबरदस्त फायदा
अधिकारियों का मानना है कि पूरा होने के बाद ये कॉरिडोर पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद होगा. ट्रैफिक जाम कम होने और गाड़ियों की आवाजाही आसान होने से कार्बन उत्सर्जन में रोज़ाना लगभग 2 टन की कमी आने की उम्मीद है. कार ड्राइवर को भी मयूर विहार को AIIMS अस्पताल से जोड़ने वाले काफी हद तक सिग्नल-फ्री रूट का फायदा मिलेगा, जिससे सफर तेज और ज्यादा आरामदायक हो जाएगा.