हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CycloneTiger ShroffGyanesh KumarBigg Boss 20

दिल्ली में गैर-BS6 वाहनों पर प्रतिबंध, NCR के लाखों लोग परेशान, बोले- सरकार की नाकामी की सजा हमें क्यों?

गुरुग्राम के एक व्यक्ति के लिए, अपने बच्चों को द्वारका के स्कूल तक गाड़ी से न ले जा पाने की स्थिति ने इन पाबंदियों और परिवारों के पास मौजूद विकल्पों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

विज्ञापन
सरकार जिस समस्या को नियंत्रित करने में विफल रही है, उसके लिए मुझे क्यों भुगतना पड़े? (Photo: ANI)

हर सुबह पिता अपने बच्चों को दिल्ली में स्कूल छोड़ने जाते हैं और कर्मचारी काम पर जाते हैं, लेकिन अब यह रोजमर्रा की भागदौड़ चिंता का एक नया कारण बनने वाली है क्योंकि 1 नवंबर से पड़ोसी एनसीआर (NCR) शहरों के 10 लाख से ज्यादा वाहनों पर पाबंदियां लागू होने जा रही हैं, और लोगों का कहना है कि वायु प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई की उन्हें रोजाना भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. परिवहन विभाग के अनुमान के अनुसार, एक नवंबर से 31 जनवरी तक BS-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के 10 लाख से अधिक वाहन प्रभावित होंगे.

सरकार विफल तो हम क्यों भुगतें?

गुरुग्राम के एक व्यक्ति के लिए, अपने बच्चों को द्वारका के स्कूल तक गाड़ी से न ले जा पाने की स्थिति ने इन पाबंदियों और परिवारों के पास मौजूद विकल्पों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करते हुए सवाल किया, ‘मैं गुरुग्राम में रहता हूं और रोज अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए द्वारका जाता हूं. मेरी गाड़ी बीएस-4 मानकों के अनुरूप है और हरियाणा में पंजीकृत है. सरकार जिस समस्या को नियंत्रित करने में विफल रही है, उसके लिए मुझे क्यों भुगतना पड़े?’

यह भी पढ़ें: रामलीला मैदान में 1 नवंबर की रैली को दिल्ली पुलिस की हरी झंडी, माननी होंगी 10 कड़ी शर्तें

विज्ञापन

कानून का पालन करने पर भी बढ़ी परेशानी

व्यक्ति ने बताया कि उसने अपने बच्चों को खुद स्कूल छोड़ने का फैसला किया है, क्योंकि उसे स्कूल बस चालकों पर भरोसा करने में असहजता महसूस होती है. उसने उन पर लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, ‘मेरे पास (वाहन का) वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और बीमा है, और मैं सभी नियमों का पालन करता हूं. मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं, तो फिर मुझे क्यों भुगतना पड़े?’ दूसरों के लिए, इन पाबंदियों का मतलब न केवल उनकी दिनचर्या में बदलाव हो सकता है, बल्कि अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त खर्च भी हो सकता है.

सुनील कुमार, गुरुग्राम के सेक्टर 104 से रोज द्वारका सेक्टर 21 मेट्रो स्टेशन तक जाते हैं और फिर वहां से अपने दफ्तर के लिए निकलते हैं, उन्होंने कहा कि अगर वे अब अपनी कार से स्टेशन तक नहीं जा पाए, तो उन्हें कैब पर निर्भर रहना पड़ सकता है. उन्होंने सवाल किया, ‘मेरी गाड़ी की प्रदूषण जांच हो चुकी है और मैं तय नियमों का पालन करता हूं. दिल्ली सरकार हमारी गाड़ियों को क्यों रोकना चाहती है?’ सुनील कुमार ने कहा कि इस विकल्प के कारण उन्हें रोजाना कैब के किराए में 500 से 1,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: ‘दुनिया की बराबरी नहीं, अब भारत को करना है लीड’, युवाओं को पीएम मोदी का संदेश, ESTIC का किया उद्घाटन

उन्होंने कहा, ‘मुझे अपने कार्यालय पहुंचने के लिए कैब पर 500 से 1000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं. यह एक सामान्य परिवार पर अतिरिक्त बोझ है, खासकर तब जब लोग पहले से ही अपने वाहनों के रखरखाव और नियमों का पालन करने पर पैसा खर्च कर रहे हैं.’ चिंताएं केवल आने-जाने के तात्कालिक खर्च तक ही सीमित नहीं हैं. कुछ निवासियों का सवाल है कि क्या ये पाबंदियां शहर में लगातार बने रहने वाले प्रदूषण के मूल कारणों को दूर कर पाएंगी. एक अन्य यात्री राजेश शर्मा ने कहा, ‘यह आदेश समस्या की जड़ को सुलझाए बिना घरेलू खर्चों को और बढ़ा देगा.’

विज्ञापन

दिल्ली यातायात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुलिस बल इन पाबंदियों को लागू करने के लिए तैयार है, और राष्ट्रीय राजधानी के सभी सीमा बिंदुओं पर, जहां से गाड़ियां गुजर सकती हैं, 100 से ज्यादा टीम तैनात की जाएंगी.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola