अडाणी फाउंडेशन द्वारा नई दिल्ली में AVPN वेलकम डिनर का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व अडाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी ने किया. कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रीति अडाणी ने मेहमानों से फाउंडेशन के लिए ज्यादा से ज्यादा सहयोग करने का आह्वान किया. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AVPN ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 में शामिल होने वाले लगभग 2000 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए एक वेलकम डिनर आयोजित किया गया. यह कॉन्फ्रेंस पहली बार भारत में हो रहा है. डॉ. प्रीति अडाणी ने जटिल सामाजिक चुनौतियों से निपटने और अधिक समुदायों तक प्रभावी समाधान पहुंचाने के लिए बेहतर सहयोग, आपसी सीख और साझेदारी का आह्वान किया है.
अडाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडाणी ने कहा है कि आज के दौर में परोपकार यानी फिलैंथ्रॉपी का लक्ष्य सिर्फ जरूरतमंदों को तत्काल मदद पहुंचाना नहीं होना चाहिए, बल्कि समुदायों और संस्थाओं को इतना सक्षम बनाना होना चाहिए कि वे लंबे समय तक अपने विकास की दिशा खुद तय कर सकें. उन्होंने फिलैंथ्रॉपी के लिए कैपिटल फॉर कैपिसिटी यानी क्षमता निर्माण के लिए पूंजी के इस्तेमाल पर जोर दिया. अडाणी फाउंडेशन की मेजबानी में हुए इस कार्यक्रम में देश-विदेश से करीब 2,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. भारत में पहली बार आयोजित हो रहे AVPN ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में फिलैंथ्रोपिस्ट, सोशल इम्पैक्ट लीडर्स, कॉरपोरेट्स, नीति-निर्माता और विकास क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट्स हिस्सा ले रहे हैं.
भारत की विकास यात्रा में तकनीक और स्थानीय नवाचार की अहम भूमिका
अपने संबोधन में डॉ. प्रीति अडाणी ने भारत की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश को उसकी महत्वाकांक्षा के पैमाने, बदलाव की गति और लोगों की ऊर्जा के नजरिए से देखना चाहिए. उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक, जमीनी स्तर पर उद्यमिता, स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय स्तर पर हो रहे इनोवेशन देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि भारत में सामाजिक क्षेत्र के लिए सालाना फंडिंग 310 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है और इसमें करीब 13 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से वृद्धि हो रही है. वहीं, भारत में अब 2 लाख से ज्यादा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं. इनमें से कई नए आइडिया अब सिर्फ बड़े शहरों से नहीं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों से भी सामने आ रहे हैं.
26 हजार से ज्यादा स्टार्टअप ने लिया हिस्सा
डॉ. प्रीति अडाणी ने अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी की ओर से शुरू की गई वन्दे मातरम् पहल का उदाहरण भी दिया. इस पहल का उद्देश्य भारत की जरूरतों से जुड़े नए और प्रभावी आइडिया की पहचान करना है. उनके मुताबिक, इसमें 26,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने आवेदन किया और इनमें से कई ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जिनका सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव भी है.
उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण बताते हैं कि भारत में नवाचार की क्षमता केवल महानगरों तक सीमित नहीं है. अगर सही संसाधन, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़े स्तर पर बदलाव लाने वाले समाधान सामने आ सकते हैं.
दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन और AI जैसी बड़ी चुनौतियां
डॉ. अडाणी ने दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी बात की. उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से विकास और सोशल मीडिया व तकनीक के अत्यधिक इस्तेमाल के नकारात्मक प्रभावों को प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया के पास पहले की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता और पूंजी है, लेकिन इन संसाधनों के इस्तेमाल में अभी भी काफी बिखराव है. ऐसे में एशिया के देशों और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत है.
‘कैपिटल फॉर कैपिसिटी’ पर दिया जोर
डॉ. प्रीति अडाणी के भाषण का प्रमुख संदेश कैपिटल फॉर कैपिसिटी रहा. उन्होंने कहा कि जरूरत के समय लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाना महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलैंथ्रॉपी को इससे आगे बढ़कर ऐसे कामों में निवेश करना चाहिए जो लोगों और संस्थाओं की क्षमता को मजबूत करें. इसके तहत उन्होंने व्यवहार में बदलाव, संस्थागत निर्माण, स्किल डेवलपमेंट, नए समाधान, क्लाइमेट एक्शन और मजबूत सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की जरूरत बताई. उनके मुताबिक, केवल पैसा जुटाना ही पर्याप्त नहीं है. संगठनों को अपने अनुभव, ज्ञान और सफल मॉडलों को साझा करना चाहिए, ताकि प्रभावी पहलों को बड़े स्तर पर लागू किया जा सके.
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डॉ. प्रीति अडाणी ने बताया कि उन्होंने 2025 में हांगकांग में आयोजित AVPN ग्लोबल कॉन्फ्रेंस के दौरान एशिया में फिलैंथ्रॉपी से जुड़े अनुभव और एक्सपर्टीज को एक साथ लाने के लिए यूनिफाइड कोलेबोरेशन प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा था. नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक क्षेत्र से जुड़े संगठनों से आपसी सहयोग और ज्ञान साझा करने की अपील की. उनका कहना था कि अलग-अलग संस्थाओं के सफल अनुभवों को एक-दूसरे तक पहुंचाने से सीमित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और सामाजिक बदलाव को बड़े स्तर पर पहुंचाया जा सकता है.
अडाणी फाउंडेशन के 30 साल पूरे
AVPN ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 का यह आयोजन अडाणी फाउंडेशन के 30 साल के जमीनी विकास कार्य से भी जुड़ा रहा. आपको बता दें कि अडाणी फाउंडेशन की स्थापना 1996 में हुई थी. फाउंडेशन के मुताबिक, उसके कार्यक्रम शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग, आजीविका, दिव्यांगता समावेशन, सामुदायिक बुनियादी ढांचे, खेल और जमीनी स्तर पर जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में चल रहे हैं. फाउंडेशन का दावा है कि उसकी पहलें 22 राज्यों के 7,200 से ज्यादा गांवों तक पहुंची हैं और 1.3 करोड़ से अधिक लोगों पर इनका प्रभाव पड़ा है.
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