दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कैंसर की दवाइयों की कालाबाजारी का खुलासा किया है. राजस्थान की भजन लाल सरकार की स्कीम के तहत कैंसर के मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाइयां भी कालाबाजारी करके बेची गई हैं. वहीं जांच में सामने आया हैं कि कैंसर के मरीज एवालुमैब इंजेक्शन को लगवा रहे हैं और उसे दिल्ली की ब्लैक मार्केट से एक-एक लाख रुपये में खरीद रहे थे, उसमें मेडिसिन नहीं हैं, बल्कि सिर्फ पानी भरा है और बैक्टीरिया भी इसके अंदर मिले हैं. दवाई बनाने वाली कंपनी ने जब ब्लैक में मिल रही दवाई की जर्मनी की मर्क लैब से कराई तो पता चला कि इसमें कैंसर से लड़ने वाला मूल इंग्रीडिएंट नहीं था.
नकली दवाओं के रैकेट का सुराग कब मिला?
दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार, कैंसर की दवाई की कालाबाजारी का 9 करोड़ रुपये तक का धंधा 7 राज्यों दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में फैला था. क्राइम ब्रांच ने 22 जून को रैकेट का सुराग मिलने पर रेड मारकर 17 लोगों को गिरफ्तार किया. 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के बॉक्स, दूसरी दवाओं की 3021 यूनिट और करीब 50 लाख केश बरामद किया. गिरफ्तार आरोपियों से बरामद की गई दवाइयों में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर की दवाएं भी शामिल हैं.
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कैंसर कर दवाई गिरोह तक कैसे पहुंचती थी?
11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस की 7 टीमों ने पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और नवी मुंबई में छापा मारा. पूछताछ में अब तक खुलासा हुआ है कि कैंसर की दवाइयां 3 तरीकों से गिरोह के सदस्यों तक पहुंचती थीं. पहला तरीका, गैर-कानूनी सोर्स से नकली दवाइयां खरीदना था. दूसरा तरीका सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों की दवाओं की हेराफेरी करना था. तीसरा तरीका सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई में आने वाली दवाओं की चोरी करना था. अवैध बिल, अवैध खरीद रिकॉर्ड, अवैध ड्रग लाइसेंस के स्टॉक इकट्ठा करते थे और बिचौलियों के जरिए दवाई को मार्केट में सप्लाई करते थे.
गिरोह नकली दवाओं की पैकिंग कैसे करता था?
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य दवाइयों के असली कार्टन और खाली बॉक्स संभाल लेते थे. बैच नंबर, MRP और जानकारी एसीटोन केमिकल से मिटाते थे. फिर थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन से दवाइयों को नए तरीके से पैक किया जाता था. छापेमारी में मौके से दवाओं के कच्चे माल और कैश के अलावा लेन-देन से जुड़ा रजिस्टर और डायरी भी मिली है. आरोपियों की पहचान लक्ष्मी नगर निवासी अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी के रूप में हुई है. अभिषेक से पुलिस ने 4 लाख रुपये बरामद किए हैं और शुभम से करीब 23 लाख रुपये बरामद किए गए हैं.
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किस आरोपी से कितना माल बरामद हुआ?
जांच में खुलासा हुआ है कि नकली दवाओं के रैकेट में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, झज्जर, फरीदाबाद, मुंबई, गाजियाबाद और हैदराबाद के लोग शामिल हैं. नोएडा के आनंद कुमार से 337 एंटी-कैंसर वायल, फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि से 108 वायल और 6.5 लाख रुपये बरामद हुए हैं. गुरुग्राम के मयंक गर्ग से 55 वायल मिले. 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज हुई थी. गिरोह का सरगना डॉ. मनीष शर्मा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दवाइयो का असली सोर्स क्या था और कौन-कौन लोग नकली दवाइयों की सप्लाई चेन से जुड़े थे? देशभर में कहां-कहां तक सप्लाई का नेटवर्क फैला था?
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