दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले में बड़ी न्यायिक जीत मिली है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों नेताओं को मामले से आरोप मुक्त करार दिया है. अदालत का साफ कहना है कि सीबीआई के पास इनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त सबूत नहीं हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला. सीबीआई द्वारा लगाया गए आरोप में कोई दम नहीं मिला, कोई आपराधिक षड्यंत्र नहीं मिला. इस फैसले के साथ ही मामले के अन्य कई आरोपी भी आरोपों से मुक्त हो गए हैं. सुनवाई के दौरान केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए, जबकि के. कविता, अमनदीप ढल जैसे अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े.
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को परखने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि जांच एजेंसियां केजरीवाल और सिसोदिया की संलिप्तता को पुख्ता करने वाले साक्ष्य पेश करने में विफल रहीं. ED या CBI के पास नेताओं को सीधे तौर पर घोटाले से जोड़ने वाले लिंक नहीं हैं. बिना ठोस सबूतों के केवल आरोपों के आधार पर मामला नहीं चलाया जा सकता. फेयर ट्रायल के लिए फेयर इन्वेस्टिगेशन जरूरी है. प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित करने में विफल रहा. फैसले के तुरंत बाद 'आप' कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई. पार्टी ने इसे सत्य की जीत करार दिया है.
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क्या था पूरा मामला?
मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, कार्टेलाइजेशन और सरकारी राजस्व को नुकसान के आरोप लगे. विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस नीति को कुछ चुनिंदा शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था, जिसके बदले में 'आप' नेताओं को भारी रिश्वत मिली थी. जांच CBI और ED ने की, यह मामला AAP के लिए बड़ा संकट बना, कई नेता जेल गए. आज कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया.
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