Anand Vihar Redevelopment: दिल्ली के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों में शुमार आनंद विहार बस टर्मिनल की किस्मत अब बदलने वाली है. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, पुनर्विकास और बेहतर रखरखाव को लेकर एक बेहद सकारात्मक और सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन का आदेश दिया है. अदालत का मानना है कि आनंद विहार जैसे बड़े और जटिल क्षेत्र का विकास कोई एक अकेली एजेंसी नहीं कर सकती, इसलिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 26 मई तक सौंदर्यीकरण की पूरी योजना को अदालत के सामने पेश करना होगा ताकि इलाके की तस्वीर को जल्द से जल्द बदला जा सके.

स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल होंगे ये दिग्गज विभाग

इस महा-अभियान को सफल बनाने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स की कमान शहरी विकास विभाग के संयुक्त सचिव को सौंपी गई है. इस टीम में दिल्ली नगर निगम के उपायुक्त, लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली परिवहन विभाग और भारतीय रेलवे के बड़े अधिकारी शामिल होंगे. इनके अलावा दिल्ली मेट्रो (DMRC), क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह दी गई है. सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष को भी इस फोर्स का हिस्सा बनाया गया है. यह सभी विभाग मिलकर 20 मई को अपनी पहली बैठक करेंगे, जिसमें आनंद विहार को जाम और गंदगी से मुक्त करने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा.

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3D मॉडल के जरिए दिखेगी आनंद विहार की नई तस्वीर

अदालत ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को विशेष निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रोजेक्ट के लिए एक योग्य आर्किटेक्ट की सेवाएं लें. यह आर्किटेक्ट न केवल सौंदर्यीकरण की योजना बनाएगा, बल्कि कोर्ट में इसका एक विस्तृत 3D इलेक्ट्रॉनिक प्रजेंटेशन भी पेश करेगा. इससे यह समझने में आसानी होगी कि पुनर्विकास के बाद आनंद विहार बस टर्मिनल क्षेत्र असल में कैसा दिखेगा. हाई कोर्ट ने कहा है कि 26 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना की समीक्षा की जाएगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि आनंद विहार को एक विश्वस्तरीय ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाए, जहां यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें और पैदल चलने वालों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

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अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण पर लगेगा अंकुश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इलाके में हो रहे अतिक्रमण और अवैध रेहड़ी-पटरी वालों की गतिविधियों पर गहरी नाराजगी जताई है. पीठ ने कहा कि बेतरतीब तरीके से फेरी लगाने वालों के कारण यात्रियों के आने-जाने में भारी रुकावट आती है और सुरक्षा का खतरा बना रहता है. इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जब तक पुनर्विकास का काम चल रहा है, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह की कोई गैरकानूनी रेहड़ी-पटरी न लगने दी जाए. अदालत ने स्पष्ट किया है कि सौंदर्यीकरण योजना में वेंडिंग जोन का भी ख्याल रखा जा सकता है, लेकिन फिलहाल फुटपाथों और रास्तों को पूरी तरह साफ रखना होगा. इस फैसले से आनंद विहार आने-जाने वाले लाखों लोगों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

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