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Abhijeet Dipke On News24 Bharat Nirman Summit 2026: मजबूरी में करना पड़ता है मार्च का ऐलान, अभिजीत दीपके का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

न्यूज 24 के विशेष कार्यक्रम ‘भारत निर्माण समिट 2026’ में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और छात्रों के मुद्दों को लेकर कई तीखे सवाल खड़े किए.

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न्यूज 24 के 'भारत निर्माण समिट 2026' में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास।

Abhijeet Dipke On News24 Bharat Nirman Summit 2026: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने न्यूज 24 के ‘भारत निर्माण समिट 2026’ में कहा कि एक महीने का समय बीत जाने के बाद भी छात्रों से जुड़ी मांगें पूरी नहीं की गईं. इसलिए मजबूरी में मार्च का ऐलान करना पड़ता है. पिछले कुछ हफ्तों से बातचीत पूरी तरह बंद कर दी गई है, जिसके चलते उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरने का फैसला लेना पड़ा. आशुतोष रांका और सौरव दास ने बताया कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में मुकदमे वापस लेने और मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को सभी FIR की सूची सौंपने का विकल्प दिया था ताकि मामलों को रद्द किया जा सके, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया.
CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद सीधे राजनीति में उतरना नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र ‘प्रेशर ग्रुप’ के तौर पर काम करना है. वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की रोकथाम और सरकारी स्कूलों की बदहाली जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के लिए यह संघर्ष जारी रखेंगे.

सवाल: आज आप लोगों का क्या मुख्य ऐलान है और आपकी मांगें क्या हैं?

अभिजीत दीपके: हम मजबूरी में यह सब कर रहे हैं, शौक से नहीं. लगभग एक महीना हो गया है और हमारी मांग है कि पीड़ितों के परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए. सरकार इसमें इतनी कंजूसी और क्षुद्रता दिखा रही है, जबकि यह कम से कम है जो कोई सरकार कर सकती है. दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर दर्ज सभी फर्जी एफआईआर वापस ली जाएं.

सवाल: सरकार का कहना है कि वे 26 लोग क्रिमिनल बैकग्राउंड के थे जो जंतर-मंतर आए थे?

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अभिजीत दीपके: अगर सरकार को पहले से पता था कि वे 26 लोग अपराधी थे, तो उन्हें खुला किसने छोड़ा था? यह तो सीधे तौर पर पुलिस और गृह मंत्री का विफलता है, क्योंकि पुलिस उनके अधीन आती है. दूसरी बात, जंतर-मंतर पर जब हमारी सख्त चेकिंग होती थी, तो इन अपराधियों को अंदर कैसे घुसने दिया गया? हमारा कहना साफ है-अगर कोई असली क्रिमिनल है तो उस पर कार्रवाई करो, लेकिन क्रिमिनल्स के नाम की आड़ में निर्दोष छात्रों को मत फंसाओ.

सवाल: आगे की क्या योजना है, क्या जंतर-मंतर 2.0 होने जा रहा है?

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अभिजीत दीपके: अगर 5 सितंबर तक छात्रों पर लगे फर्जी केस वापस नहीं लिए गए और पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा नहीं दिया गया तो 5 सितंबर को हम इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे.

सवाल: मुआवजे की जरूरत पर आपका क्या कहना है?

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अभिजीत दीपके: जो छात्र वहां आए थे, वे ज्यादातर लोअर-मिडिल क्लास या किसान परिवारों से आते हैं. लोग अपनी जमीनें गिरवी रखकर बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए कोचिंग की भारी फीस भरते हैं. मैं आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार से मिला था; उनके पिता को पैरालिसिस का अटैक आया हुआ था और उन्हें उम्मीद थी कि बेटी डॉक्टर बनकर घर संभालेगी. अब बेटी नहीं रही और छोटा बच्चा भी है.

सवाल: यह पूरा आंदोलन और ‘CJP’ शुरू कैसे हुआ?

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अभिजीत दीपके: मैं बोस्टन में जॉब ढूंढ रहा था. दिन भर जॉब अप्लाई करता, शाम को जिम जाता और रात को प्लेस्टेशन पर फीफा खेलता. एक दिन ब्रेक के दौरान ट्विटर खोला तो देखा कि युवाओं को संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अपमानित किया जा रहा है. मैंने मजाक-मजाक में लिख दिया ‘what if all cockroaches come together? और वापस फीफा खेलने लगा.

सवाल: फिर यह अचानक इतना बड़ा कैसे बना?

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अभिजीत दीपके: दो-तीन घंटे बाद जब मोबाइल देखा तो ढेरों कमेंट्स थे कि हमें अपनी पार्टी या संगठन लॉन्च करना चाहिए. हम देर से सोने वाले लोग हैं, तो मैंने सोचा चलो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से कुछ व्यंग्य करते हैं. मैंने एआई (AI) से चश्मे वाले कॉकरोच का ग्राफिक बनाया और अपनी पर्सनल ईमेल आईडी से एक गूगल फॉर्म बनाकर डाल दिया. मुझे लगा 10-15 लोग भरेंगे, लेकिन जब सोकर उठा तो 50,000 लोग साइन अप कर चुके थे. मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं था.

सवाल: सोशल मीडिया पर बढ़ती फॉलोइंग और रिएक्शन कैसा रहा?

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अभिजीत दीपके: पहले हमने इसे केवल वर्चुअल रखने का सोचा था. मैंने CJP 2029 ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल बनाए. इंस्टाग्राम पर शुरू में लगा 10-15 हजार फॉलोअर्स आएंगे, लेकिन आधे घंटे में ही इतने आ गए और देखते ही देखते 4 दिनों में 20 मिलियन के करीब फॉलोअर्स हो गए और हमने बीजेपी के हैंडल को भी ओवरटेक कर लिया. तब समझ आया कि लोगों के अंदर कितना भारी असंतोष और फ्रस्ट्रेशन था, क्योंकि उन्हें कीड़े-मकोड़ों की तरह ट्रीट किया जा रहा था.

सवाल: जब आपको ‘नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट’ कहा गया, तो कैसा लगा?

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अभिजीत दीपके: इस बात से मुझे बहुत दुख हुआ. बचपन से देश से प्यार किया है, 15 अगस्त और 26 जनवरी पर ए.आर. रहमान का ‘मां तुझे सलाम’ सुनकर और ‘बॉर्डर’ या ‘चक दे इंडिया’ जैसी फिल्में देखकर बड़े हुए हैं. अगर मैंने कोई भड़काऊ बात की होती या पीएम की तीखी आलोचना की होती, तब भी समझ आता, लेकिन एक पॉलिटिकल सटायर के लिए आप हमें ‘देश की सुरक्षा के लिए खतरा’ बोल रहे हैं? बोस्टन में भी लोग हमें सबसे पहले एक ‘इंडियन’ के तौर पर पहचानते हैं और अपने ही देश में ऐसा कहा जाए तो चोट पहुंचती है.

सवाल: आपके पारिवारिक बैकग्राउंड और पढ़ाई के बारे में बताइए?

अभिजीत दीपके: मैं संभाजीनगर में पैदा हुआ. मैं एक दलित परिवार से आता हूँ. मेरे पिताजी को आरक्षण का लाभ मिला जिससे वे सरकारी नौकरी में इंजीनियर बने. इसी वजह से मुझे प्राइवेट स्कूल में पढ़ने और बेहतर मौके मिलने का सौभाग्य मिला. मेरे गांव या रिश्तेदारों में ज्यादा लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए मैंने जमीनी हकीकत करीब से देखी है.

सवाल: आगे की पढ़ाई और करियर का सफर कैसा रहा?

अभिजीत दीपके: मैंने 12वीं के बाद साइंस और कॉमर्स दोनों ट्राई किया, फिर पुणे से ‘कम्युनिकेशंस’ में अंडरग्रेजुएट किया. इसके बाद दिल्ली आकर आम आदमी पार्टी में सोशल मीडिया का काम किया. फिर उच्च शिक्षा के लिए बोस्टन गया.

सवाल: आपकी विचारधारा क्या है-लेफ्ट, राइट या सेंटर?

अभिजीत दीपके: हम संविधान में विश्वास रखते हैं. संविधान की विचारधारा ही हमारी विचारधारा है. हमारा मानना है कि देश में असल मुद्दों पर बात होनी चाहिए-जैसे पब्लिक हेल्थ, सरकारी स्कूल और युवाओं के अधिकार.

सवाल: क्या चुनाव लड़ने या पॉलिटिकल पार्टी बनाने का कोई इरादा है?

अभिजीत दीपके: अभी राजनीति में जाने का कोई प्लान नहीं है. अगर पार्टी बना ली तो उसे बचाने और रोज़ ईडी, सीबीआई, आईटी के छापों से निपटने में ही सारा समय निकल जाएगा. हम एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करना चाहते हैं.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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