इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने मंगलवार को MSc के 31 साल के छात्र की मौत पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. IIT दिल्ली ने दुख और हैरानी जाहिर की है. संस्थान ने उसकी मौत की जांच के लिए कमेटी बनाई है. IIT दिल्ली ने एक बयान में कहा, ''संस्थान इस दुख की घड़ी में छात्र के परिवार और दोस्तों के साथ खड़ा है. IIT दिल्ली के स्टूडेंट, स्टाफ और बाकी कर्मचारी छात्र के परिवार को आर्थिक मदद देने में जी जान से जुटे हैं. दरअसल, छात्र की मौत के बाद दिल्ली कैंपस में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें छात्र की मौत को लेकर IIT से जवाबदेही मांगी थी.

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क्या है मामला?

दरअसल, 22 अगस्त को MSc के एक छात्र ने IIT कैंपस में मौजूद संस्थान के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी, जिसके बाद से छात्रों में आक्रोश था. 24 अगस्त को कैंपस में बड़े लेवल पर विरोध प्रदर्शन हुए. छात्रों ने हाथ में प्लेकार्ड लिए थे, जिसपर लिखा था- 'IIT-D: सपने या मौत'. उन्होंने स्टूडेंट्स वेलफेयर ऑफिस के डीन और एसोसिएट डीन के साथ-साथ फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड के इस्तीफे की मांग की. छात्रों ने संस्थान को एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें लिखा है- ''हम प्रशासन की उन गलतियों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं जिनकी वजह से छात्र ने अपनी जान दे दी. साथ ही, हम आवास सुविधा ना मिलने और एकेडमिक प्रोजेक्ट्स से वंचित किए जाने जैसे मुद्दों के समाधान और काउंसलिंग चाहने वाले छात्रों के लिए संस्थान के मेंटल हेल्थ प्रोटोकॉल के स्पष्ट खुलासे की भी मांग करते हैं. हम स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस के डीन और एसोसिएट डीन (ADSW और ADHM) तथा फिजिक्स विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की भी मांग करते हैं. इसके अलावा, हम मांग करते हैं कि छात्र के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.

IIT दिल्ली का बयान

IIT दिल्ली ने अपने बयान में कहा कि इस साल होली के जश्न के बाद मृतक छात्र के दोस्तों के कहने पर उसे संस्थान के अस्पताल भेजा गया. बयान में कहा गया, ''इंस्टिट्यूट के साइकियाट्रिस्ट ने उनकी जांच की और उन्हें मदद दी, जिसके बाद उनके परिवार ने बताया कि वो उन्हें एक स्पेशलाइज़्ड हॉस्पिटल ले जाना चाहते हैं. इसके बाद, उन्हें स्पेशलाइज़्ड हॉस्पिटल में लगभग एक महीने तक भर्ती रखकर इलाज किया गया और फिर छुट्टी दे दी गई." इंस्टिट्यूट ने ये भी बताया कि स्टूडेंट की दूसरे और तीसरे सेमेस्टर से हटने की रिक्वेस्ट को मंज़ूरी दे दी गई थी और मेडिकल सलाह में माता-पिता की देखरेख में रहने की बात कही गई थी. इंस्टिट्यूट के मुताबिक, उन्हें जुलाई और अगस्त में काउंसलिंग और इलाज में भी मदद मिली.

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