देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहसों के बीच छत्तीसगढ़ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक बयान में कहा कि राज्य में इसके क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है. मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर साझा की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह पांच सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने और इसे लागू करने की रूपरेखा तय करेगी.

पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी नेतृत्व


छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस हाई-लेवल कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है. समिति में उनके साथ रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम के राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और पूर्व प्राचार्या ज्योति रानी सिंह को बतौर सदस्य शामिल किया गया है.

यह भी पढ़ें: SSC CGL 2026 के लिए फिर शुरू हुए आवेदन, फीस और करेक्शन की डेट्स भी बदलीं

यह समिति वर्तमान में लागू विभिन्न पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानूनों) की समीक्षा करेगी और विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, संपत्ति का उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों का गहन अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी. इसके अलावा, समिति आम नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से भी सुझाव आमंत्रित करेगी.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्या कहा?


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दृढ़ता से कहा है कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने बीते 15 अप्रैल को कैबिनेट बैठक में इस समिति के गठन की घोषणा की थी. सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिक कानूनों को सरल बनाना, विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना और समाज में लैंगिक व कानूनी समानता को बढ़ावा देना है.

यह भी पढ़ें: ट्रेन में यात्रा पूरी होने के बाद वापस मिलेगा टिकट का पूरा पैसा! कैसे रेलवे के इस नियम से मिलेगा रिफंड?