महिला वर्कर्स की मैटरनिटी लीव को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने ये साफ किया है कि अगर कोई महिला मिसकैरेज के दौरान छुट्टी लेती है तो उसे मैटरनिटी लीव में नहीं काउंट किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि मिसकैरेज की छुट्टी और मैटरनिटी लीव दोनों अलग-अलग हैं. साथ ही कोई भी कंपनी महिला कर्मचारी को लीव बैलेंस कम होने का हवाला देकर उसके मातृत्व अधिकार नहीं छीन सकती. कोर्ट के इस फैसले से महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी.
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FCI की अपील खारिज
फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) की महिला कर्मचारी किरण गौतम शर्मा के केस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने FCI की अपील खारिज कर दी. अदालत ने मिसकैरेज और मैटरनिटी लीव को लेकर अपना फैसला बरकरार रखा. दरअसल, साल 2019 में किरण गौतम शर्मा प्रेगनेंट थी और उनके पेट में जुड़वा बच्चे थे. इस दौरान अप्रैल में किसी परेशानी की वजह से उनके एक भ्रूण का मिसकैरेज हो गया. डॉक्टर्स ने कहा कि दूसरे भ्रूण की जान को भी खतरा है, ऐसे में उनको बेड रेस्ट पर रहना ज़रूरी है. सितंबर में किरण गौतम ने एक बेटी को जन्म दिया.
कंपनी से मांगा इलाज खर्च
मिसकैरेज और प्रेगनेंसी के दौरान किरण गौतम ने नियम के मुताबिक छुट्टी मांगी थी. इसके साथ ही उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए इलाज के खर्च का पैसा रिवोक करने की भी सिफारिश की थी. किरण गौतम ने बताया कि उन्हें लंबे वक्त तक आराम और इलाज की ज़रूरत पड़ी. FCI ने उनकी 68 दिनों की छुट्टी को एक्सट्रा ऑर्डिनरी लीव मान लिया. इस वजह से FCI ने उसे 68 दिनों की सैलरी नहीं दी और उनकी सैलरी से 80,254 रुपये की कटौती भी की, जिसके बाद किरण गौतम ने अदालत का रुख किया. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस बारे में फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला कर्मचारी को मिसकैरेज और मैटरनिटी लीव का फायदा मिलना चाहिए. अदालत ने कंपनी को आदेश दिए कि वो 90 दिन की छुट्टी का फायदा और उनकी सैलरी में हुई कटौती को वापस करे.
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