छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस के पास संस्थागत शक्ति होती है जो राज्य की ओर से मिलती है. ऐसे में यह जरूरी नहीं है कि किसी पीड़िता की सहमति हमेशा उसकी खुद की इच्छा से हो. वह कानूनी कार्रवाई के डर या पुलिस के दबाव की वजह से भी सहमति दे सकती है. इसलिए सिर्फ सहमति का हवाला देकर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती. आदिवासी विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपी कॉन्स्टेबल रुद्रमणि यादव की अग्रिम जमानत याचिका जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने खारिज कर दी.

फेसबुक के जरिए महिला से हुई थी दोस्ती

मामला जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र का है. यहां तैनात कॉन्स्टेबल रुद्रमणि यादव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की थी. आरोप है कि साल 2023 में उसने फेसबुक के जरिए एक विधवा महिला से दोस्ती की और फिर उससे लगातार बातचीत करने लगा. महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि कॉन्स्टेबल ने उसके साथ दुष्कर्म किया. महिला के मुताबिक, लगातार शारीरिक संबंध बनाने के कारण वह गर्भवती हो गई थी. इसके बाद आरोपी ने उसका गर्भपात करा दिया. आरोप है कि इसके बाद कॉन्स्टेबल उसे धमकाने लगा. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी तस्वीरें उसके रिश्तेदारों में वायरल कर दीं. इसके अलावा जमीन दिलाने के नाम पर उससे दो लाख रुपये लेने का भी आरोप है. पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर कॉन्स्टेबल के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

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आरोपी ने कहा- सहमति से थे संबंध

कॉन्स्टेबल की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि दोनों बालिग हैं और करीब तीन साल से सहमति से संबंध में थे. आरोपी ने यह भी कहा कि करीब तीन साल बाद एफआईआर दर्ज कराई गई, इसलिए उसे झूठे मामले में फंसाया गया है. वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता और जांच में सामने आए सबूतों का हवाला दिया. कोर्ट को बताया गया कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति की विधवा महिला है और आरोपी पुलिसकर्मी होने की वजह से अपनी वर्दी और पद का फायदा उठा सकता है.

गंभीर आरोपों के चलते नहीं मिली राहत

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पर साल 2023 से जबरन संबंध बनाने, महिला के गर्भवती होने और गर्भपात कराने, धमकी देने, तस्वीरें वायरल करने और दो लाख रुपये लेने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. कोर्ट ने पीड़िता की स्थिति और मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखते हुए कहा कि यह मामला उस फैसले से अलग है, जिसका हवाला आरोपी पक्ष ने दिया था. इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कॉन्स्टेबल रुद्रमणि यादव को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उसकी याचिका खारिज कर दी.

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