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नालंदा में दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 1-1 लाख हर्जाने का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने नालंदा में दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द कर दिया. राज्य सरकार को दोनों को 1-1 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया.

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पटना हाईकोर्ट ने दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द किया (Photo-Wikipedia)

पटना उच्च न्यायालय ने नालंदा जिले में दो लोगों को बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (BCCA) के तहत ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने और उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने माना कि जिला प्रशासन ने उचित सत्यापन किए बिना उनके खिलाफ कार्रवाई की थी. कोर्ट ने राज्य सरकार को दोनों याचिकाकर्ताओं को एक-एक लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है. इसके अलावा मुकदमे की वजह से हुए खर्च की भरपाई के लिए दोनों को 10-10 हजार रुपये देने को भी कहा गया है.

पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई थी कार्रवाई

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश 11 सितंबर को दिया. मामले में शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह ने अपने खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी. दोनों के खिलाफ कार्रवाई नालंदा के पुलिस अधीक्षक की उस संस्तुति के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें उन्हें ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने की बात कही गई थी. यह संस्तुति वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव और छठ पूजा के दौरान राजगीर के अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी (SDPO) की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में कहा कि उन्हें आपराधिक मामलों में गलत तरीके से फंसाया गया है और वे पहले से ही जमानत पर हैं.

डीएम ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

अदालत के अनुसार, SDPO की रिपोर्ट के आधार पर नालंदा के एसपी ने दोनों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने की संस्तुति की. इसके बाद उनके खिलाफ BCCA के तहत अलग-अलग मामले दर्ज किए गए.
मामला दर्ज होने के बाद नालंदा के जिलाधिकारी ने 10 सितंबर 2025 को दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. खंडपीठ ने अपने आदेश में बताया कि जिलाधिकारी ने यह आधार लिया था कि दोनों अपने बचाव में कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर सके. साथ ही, उनकी स्वतंत्र आवाजाही से इलाके में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होने की आशंका जताई गई थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को रद्द करते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं को हर्जाना और मुकदमे में हुए खर्च की राशि देने का निर्देश दिया.

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