बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से आग लगने की एक बड़ी घटना सामने आई है. मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में भीषण आग लग गई, और खबरों के मुताबिक इस घटना में अब तक 3 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. इस घटना को लेकर मरीजों के परिजन आक्रोश में हैं. एक मरीज के परिजन ने बताया कि जैसे ही आग लगी, अफरा-तफरी मच गई. उनका कहना है कि हमने खुद अंदर जाकर मरीजों को बाहर निकाला, अस्पताल का कोई स्टाफ मदद करने नहीं आया.

इस घटना के बाद कई चश्मदीदों का भी बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने पूरी घटना के बारे में डराने वाली जानकारी दी है.

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लोगों ने लगाए अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप

चश्मदीद धर्मेंद्र कुमार ने रोते हुए अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि उनकी चाची गीता देवी ICU में भर्ती थीं. आग रात के करीब 3 बजे लगी और उस वक्त ICU में लगभग 20 मरीज थे. हैरान करने वाली बात यह है कि हादसे के समय वहां कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था. जब पूरा वार्ड धुएं से भर गया, तब जाकर अस्पताल का स्टाफ वहां पहुंचा. ऐसे में आप भला कितने लोगों को बचा पाएंगे. धर्मेंद्र ने आगे दिल दहला देने वाला दावा करते हुए कहा कि उनकी चाची की बॉडी को अस्पताल के बाहर फेंक दिया गया था, जिसे उन्होंने खुद ढूंढकर निकाला है. यह अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है.

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शॉर्ट सर्किट से आईसीयू में आग लगी- फायर ब्रिगेड अधिकारी

यह घटना मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद हॉस्पिटल की है. फायर ब्रिगेड कर्मी ने कहा कि टीम के पहुंचने के बाद लोगों का रेस्क्यू किया गया. अस्पताल प्रबंधन के लोग मौके से फरार थे. मौके पर फायर ब्रिगेड की एक दर्जन गाड़ियां पहुंचीं. स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू में मदद की. हमने 15 से 20 लोगों का रेस्क्यू किया है. हम लोग यहां करीब 4 बजे आ गए थे. फायर ब्रिगेड के अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट से आईसीयू में आग लगी.

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ICU में करीब 25-26 लोग थे- बुजुर्ग

इस दौरान एक बुजुर्ग ने कहा कि मेरी बहन भर्ती थीं, उनकी मौत हो गई है. अस्पताल में जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो अधिकारियों के सामने मरीज के एक परिजन ने दावा करते हुए कहा कि आईसीयू में करीब 25 से 26 लोग थे. हमने पांच को बाहर निकाला. अपने भाई को निकाला, वो वेंटीलेटर सपोर्ट पर था. उसकी मौत हो गई.

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