RJD की पूर्व नेता रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार अपने राजनीतिक साथियों को बार-बार 'धोखा' देने का नतीजा भुगत रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि BJP ने नीतीश कुमार के साथ बुरा बर्ताव किया और उन्हें राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए 'मजबूर' किया. बता दें, नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़कर, राज्यसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं.
रोहिणी आचार्य ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार कई पोस्ट किए हैं. उन्होंने एक पोस्ट में 'चाचा जी' कहते हुए लिखा है, 'आसमान से गिरे, खजूर पर अटके… चाचा जी, पीएम की कुर्सी पर बैठने के अरमान धरे के धरे रह गए. चाचा जी मुख्यमंत्री की कुर्सी से भी बड़ी बेरुखी के साथ जबरन हटाए गए.'
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ऐसी ही एक पोस्ट में लिखा है, 'चाचा जी .. एक दफा फिर से याद दिला देती हूं आपको अपने किए का फल, देर-सवेर अपने हिस्से ही आता है. जैसी करनी, वैसी भरनी.'
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नीतीश कुमार के करीबी लोगों पर निशाना साधते हुए रोहिणी ने लिखा है, 'नीतीश कुमार को किनारे/ठिकाने लगाने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन लोटस' की स्क्रिप्ट जरूर भाजपा ने लिखी, लेकिन अमलीजामा नीतीश कुमार की ही पार्टी के उनके ही कुछ बेहद करीबियों ने पहनाया.'
एक लंबी पोस्ट में रोहिणी ने लिखा है, 'अपनों के साथ बार-बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी… खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं. आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हकदार हैं. अवसरवादिता के शिखर पुरुष नीतीश कुमार को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा ने मजबूर किया, ये तो 28 जनवरी, 2024 को ही तय हो गया था. जब नीतीश कुमार ने गुलाटी मारने की अपने जगजाहिर कौशल की पुनरावृत्ति करते हुए महागठबंधन/इंडिया अलायन्स का साथ छोड़ा था. कुर्सी से चिपके रहने की अपनी मजबूरी की वजह से ही आज नीतीश कुमार उस भाजपा के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं, जो अपने सहयोगियों की राजनीतिक कब्र खोदने और उनको दफनाने के लिए ही जानी जाती है.'
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रोहिणी ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे का जो हश्र भाजपा ने किया, नीतीश कुमार उससे भी नहीं चेते और अपने पुराने समाजवादी साथियों के बार-बार आगाह करने के बावजूद खुद ही कब्र सरीखी भाजपा की गोद में जा बैठे.'
इसके अलावा उन्होंने लिखा, 'अपने ही विनाश के लिए भाजपा के द्वारा जारी तुगलकी फरमान पर अपनी रजामंदी देने वाले नीतीश कुमार के बारे में अब दो बातें तो जाहिर एवं साबित होती हैं कि नीतीश कुमार की सोचने-समझने की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो चुकी है और नीतीश कुमार की कोई बहुत कमजोर नस भाजपा ने जरूर दबा रखी है.'
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बता दें, नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन फाइल कर दिया है. अब सियासी गरियारे में चर्चा है कि बिहार का मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का होगा.