बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत हासिल की है. बीजेपी के 35 साल पुराने गढ़ में उसी को मात देकर अब पीके बांकीपुर के नए विधायक बनेंगे. आज बिहार में सिर्फ उन्हीं का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. हर कोई उनके अतीत के बारे में जानना चाहता है, वो कितने पढ़े-लिखे हैं, उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा, वगैरह-वगैरह. चलिए तो आज हम इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.

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कितने पढ़े-लिखे हैं पीके?

प्रशांत किशोर बिहार के ही निवासी हैं. उनका जन्म 20 मार्च 1977 को रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ, जिसके बाद परिवार बक्सर में जाकर बस गया. पीके की पढ़ाई बिहार में शुरू हुई. 1991 में बक्सर के एक स्कूल से 10वीं पास करने के बाद उन्होंने 1993 में पटना से 12वीं क्लास पास की. आगे की पढ़ाई के लिए प्रशांत किशोर ने लखनऊ यूनिवर्सिटी का रुख किया और BBA से ग्रेजुएशन की. मास्टर्स की पढ़ाई उन्होंने हैदाराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) से की. पीके ने मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (MHA) में पोस्ट ग्रेजुएशन की. इसके बाद प्रशांत किशोर फ्रांस गए और CAVILAM Vichy से फ्रेंच सीखी.

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क्यों छोड़ दी UN की नौकरी?

प्रशांत किशोर ने राजनीति में एंट्री लेने से पहले करीब 8 साल संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग वाले पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के साथ भी काम किया. इसके बाद उनका रुझान पॉलिटिक्स की तरफ बढ़ने लगा और वो नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए. सबसे पहले प्रशांत किशोर ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) की स्थापना की और बतौर चुनावी रणनीतिकार काम करने लगे. लंबे समय तक दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने के बाद 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी बनाने की ठानी. आज वही जन सुराज पार्टी बांकीपुर में ऐसा एक चुनाव जीत गई, जिसके बारे में कल्पना करना भी किसी के लिए मुश्किल था.

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