बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर एक बार फिर खींचतान शुरू हो गई है. रविवार को बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने इस कानून की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि या तो शराबबंदी को ठीक से लागू किया जाए, नहीं तो इसे पहले की तरह खत्म कर देना चाहिए. विनय बिहारी के इस बयान ने विपक्षी दलों से पहले गठबंधन के साथियों को ही असहज कर दिया है. इससे पहले भी जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता समय-समय पर शराबबंदी की समीक्षा और इसमें ढील देने की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन बीजेपी के विधायक के इस ताजा बयान ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है.
कानून खत्म करना पूरी तरह बेईमानी
बीजेपी विधायक की मांग पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है. जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों पर चलते हुए और मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हुए बिहार में शराबबंदी लागू की है. उन्होंने साफ किया कि समय-समय पर कानून की समीक्षा जरूर होती है, लेकिन समीक्षा की आड़ में इसे खत्म करने या ढील देने की बात करना पूरी तरह बेईमानी है. अभिषेक झा ने जोर देकर कहा कि ऐसा करना कतई संभव नहीं है. उन्होंने विनय बिहारी के बयान को उनका व्यक्तिगत मामला बताते हुए उस पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और संकेत दिया कि सरकार अपने फैसले पर अडिग है.
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बीजेपी ने संभाला मोर्चा
गठबंधन में बढ़ती कलह को थामने के लिए बिहार बीजेपी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने बीच-बचाव किया है. उन्होंने कहा कि विनय बिहारी ने जो चिंता व्यक्त की है, वह केवल जमीनी चुनौतियों की ओर इशारा कर रही है. हालांकि, बीजेपी का आधिकारिक स्टैंड यह है कि शराबबंदी का फैसला समाज के हित में लिया गया एक ऐतिहासिक निर्णय है. प्रभाकर मिश्रा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इस कानून से लाखों परिवारों के घर उजड़ने से बचे हैं और महिलाओं को सम्मान मिला है. बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि वे इस कानून को खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि इसे और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
अवैध कारोबार पर सख्ती
बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जहां भी अवैध शराब का कारोबार हो रहा है, वहां सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है और आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने स्वीकार किया कि हर नीति में सुधार की गुंजाइश होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी सामाजिक सुधार के बड़े अभियान को ही बंद कर दिया जाए. एनडीए सरकार का अंतिम लक्ष्य एक शराब मुक्त, सुरक्षित और समृद्ध बिहार बनाना है. फिलहाल, जेडीयू और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि छोटी-मोटी बयानबाजी के बावजूद गठबंधन शराबबंदी के मुद्दे पर एकजुट है, लेकिन अंदरूनी नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है.
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