बिहार में राजनीतिक का ऐतिहासिक दिन साबित हुआ है। बिहार की राजनीतिक में दशकों से सहयोग करने वाली बीजेपी ने पहली बार प्रदेश में अपना सीएम बनाया है। करीब 20 सालों के सफर के बाद अब नीतीश कुमार दिल्ली रवाना हो गए हैं। बीजेपी ने नए सीएम के रूप में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को चुना है। चौधरी यूं ही बिहार के सम्राट नहीं बने हैं। विरासत में राजनीति मिलने के बाद भी सम्राट ने शुरूआत से ही अपनी पकड़ बनाई। आइए जानते हैं उनका राजनीतिक सफर…
सम्राट चौधरी का मूल नाम राकेश कुमार है। चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को बिहार में मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता शकुनी चौधरी दिग्गज नेता और 7 बार विधायक-सांसद रह चुके हैं। वहीं मां पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं। सम्राट ने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। साल 2025 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी की टिकट पर सम्राट चौधरी विधायक बने थे। मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 तक भाजपा बिहार राज्य इकाई के अध्यक्ष भी रहे। इससे पहले चौधरी राष्ट्रीय जनता दल सरकार में विधायक और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
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1990 में राजनीति की शुरुआत
सम्राट चौधरी ने साल 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। सबसे पहले 19 मई 1999 को बिहार सरकार में कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली थी। साल 2000 और 2010 में परबत्ता (विधानसभा क्षेत्र) से चुनाव लड़ा और विधायक बने। साल 2010 में सम्राट को बिहार विधानसभा में विपक्षी दल का मुख्य सचेतक बनाया गया। 2 जून 2014 को सम्राट बिहार सरकार में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री के रूप में शपथ ली और कार्यभार संभाला।
8 साल में बीजेपी ने दिया ईनाम
सम्राट चौधरी ने साल 2018 में बीजेपी ज्वाइन की। बीजेपी ने बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया। बीजेपी से पहले सम्राट राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े थे। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन का स्टार प्रचारक बनाया गया। हालांकि लालू प्रसाद यादव के जातिगत समीकरण पर एक विवादास्पद बयान देने के बाद वे विवादों में घिर गए। 8 साल में बीजेपी ने सम्राट चौधरी को सीएम पद का ईनाम दिया है।
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नीतीश सरकार में मंत्री
2021 में सम्राट को नीतीश कुमार के विस्तारित मंत्रिमंडल में भाजपा कोटे से पंचायती राज मंत्री बनाया गया। उन्होंने जीतन राम मांझी सरकार में 2014 में शहरी विकास और आवास, स्वास्थ्य मंत्री और राबड़ी देवी सरकार में 1999 में कृषि मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।
राकेश कुमार से सम्राट चौधरी तक
सम्राट चौधरी से जुड़ा रोचक किस्सा है कि इनका मूल नाम राकेश कुमार है। जानकारी के अनुसार, 2010 तक राकेश नाम का प्रयोग किया। इसके बाद वो सम्राट चौधरी बन गए। राकेश नाम किताबों और मार्कशीट तक सीमित रह गया। राजनीति में वह सम्राट बनकर उभरे।
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