बिहार कांग्रेस में बगावत के सुर? खेमे में खलबली, NDA की 'नजर' और विधायकों की 'खामोशी' के मायने

Bihar Congress: बिहार की सियासत से बड़ी खबर सामने आ रही है. चर्चा है कि कांग्रेस के कई विधायक एनडीए (NDA) के संपर्क में हैं और राज्य में एक बार फिर ‘दलबदल’ का बड़ा अध्याय लिखा जा सकता है. कांग्रेस आलाकमान अब डैमेज कंट्रोल मोड में है. विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशें जारी हैं.

BIHAR congress
विज्ञापन

Bihar Congress News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बिहार कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी को अपने विधायकों के टूटने का डर सताने लगा है. कांग्रेस द्वारा ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ की रणनीति बनाने के लिए पटना स्थित पार्टी कार्यालय में बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक में कांग्रेस के 6 में से 3 विधायक नहीं पहुंचे. विधायकों की अनुपस्थिति के बावजूद कांग्रेस ने ‘ऑल इज वेल’ कहा है. कांग्रेस के कुछ विधायक सत्ताधारी खेमे के संपर्क में हैं. हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी का कोई भी नेता इस पर खुलकर बोलने से बच रहा है.

यह भी पढ़ें: बिहार में कौन सी सियासी खिचड़ी पका रहे लालू के लाल? मकर संक्रांति को लेकर एक तीर से साधे कई निशाने

विज्ञापन

टूट की सुगबुगाहट और बढ़ता अविश्वास

बिहार विधानसभा के मौजूदा गणित को देखें तो कांग्रेस के पास विधायकों की एक महत्वपूर्ण संख्या है. सूत्रों का दावा है कि इनमें से एक गुट लंबे समय से प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली और इंडिया ब्लाक में अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहा है. एनडीए खेमे से मिल रहे “संकेतों” ने इस आग में घी डालने का काम किया है. बताया जा रहा है कि कम से कम 5 से 7 विधायक पाला बदलने की फिराक में हैं. पहले भी कई मौकों पर देखा गया है कि टूट के डर से कांग्रेस अपने विधायकों को दूसरे राज्यों (जैसे हैदराबाद या बेंगलुरु) के रिसॉर्ट्स में शिफ्ट कर देती है. इस बार भी ऐसी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.

एनडीए का मास्टरप्लान और ‘मिशन बिहार’

बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन राज्य में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करना चाहता है. लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी खेमे को कमजोर करना एनडीए की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस के विधायक टूटकर अलग होते हैं तो न केवल महागठबंधन कमजोर होगा, बल्कि विपक्षी एकजुटता के दावों पर भी सवाल खड़े होंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे विधायकों की नाराजगी को दूर करें.

दलबदल कानून की चुनौती

किसी भी पार्टी से अलग होने के लिए विधायकों को ‘दो-तिहाई’ (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है ताकि उनकी सदस्यता बची रहे. बिहार कांग्रेस में कुल 19 विधायक हैं. ऐसे में दलबदल कानून से बचने के लिए कम से कम 13 विधायकों का एक साथ आना जरूरी है. अगर संख्या इससे कम रहती है तो विधायकों की सदस्यता पर खतरा मंडरा सकता है.

विज्ञापन

आलाकमान की पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती

कांग्रेस आलाकमान अब डैमेज कंट्रोल मोड में है. विधायकों को एकजुट रखने के लिए बैठकों का दौर शुरू हो सकता है. जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते असंतोष को नहीं दबाया गया, तो बिहार में एक बार फिर पाला बदलने का खेल देखने को मिल सकता है. बिहार की राजनीति हमेशा से चौंकाने वाली रही है. अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस अपनी ‘दीवार’ बचा पाती है या एनडीए इसमें सेंध लगाने में कामयाब होती है.
उधर, एनडीए के नेताओं का कहना है कि वे किसी को तोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि विपक्षी दलों के नेता खुद अपनी पार्टियों में घुटन महसूस कर रहे हैं और विकास की राजनीति से जुड़ना चाहते हैं. वहीं, कांग्रेस इस पूरे मामले को बीजेपी की ‘लोकतंत्र विरोधी’ साजिश बता रही है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ