बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित दिल्ली जाने की चर्चाओं ने हलचल बढ़ा दी है. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद की समाप्ति के बाद उनका अगला पड़ाव राज्यसभा के माध्यम से राष्ट्रीय राजनीति हो सकता है. इसके साथ ही राज्य की नौकरशाही में भी हलचल तेज हो गई है.

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के करीब माने जाने वाले कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की फाइलें तेजी से आगे बढ़ रही हैं. इन अधिकारियों में मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, उनकी पत्नी और आईएएस अधिकारी प्रतिमा एस. वर्मा, अपर मुख्य सचिव वंदना प्रेयसी, सचिव गोपाल सिंह, अपर मुख्य सचिव बी. राजिंदर और अपर मुख्य सचिव हरजोत कौर बम्हारा प्रमुख रूप से शामिल हैं.

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वहीं चर्चा है कि आईएएस अधिकारियों की फाइलों को प्राथमिकता मिल रही है, जबकि आईपीएस अधिकारियों की फाइलों में अपेक्षाकृत देरी हो रही है. प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. आंकड़ों के अनुसार फिलहाल बिहार कैडर के 29 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, जबकि करीब 78 अधिकारी ऐसे हैं जो केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए पात्र हैं. बिहार में कुल आईएएस अधिकारियों की संख्या 359 है, जबकि तैनाती केवल 303 अधिकारियों की है.

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राजनीतिक रूप से यह मामला भी गर्माता जा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री अपने करीबी अधिकारियों को केंद्र में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि दिल्ली में भी उनकी पकड़ मजबूत रहे. वहीं सत्तापक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए आरोपों को खारिज कर रहा है.

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि "आने वाला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा, ऐसे में वर्तमान अधिकारियों को डर सता रहा है कि कहीं वे बलि का बकरा न बन जाएं, इसलिए वे बिहार से दिल्ली जाना चाह रहे हैं."

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो इसका असर बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और सियासी समीकरणों दोनों पर पड़ेगा. फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या ठोस निर्णय सामने आता है.

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की संभावना बिहार की राजनीति में नया समीकरण बनाएगी और नौकरशाही पर भी इसका असर दिखेगा."