बिहार के नालंदा में स्थित प्रसिद्ध मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को चैत्र नवरात्र और शीतलाष्टमी के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ने से बड़ा हादसा हो गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर में मची भगदड़ की वजह से 9 श्रद्धालुओं की जान चली गई है. घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लापरवाही बरतने के आरोप में थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
आखिर कैसे बिगड़े हालात?
इस मंदिर में हर मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन चैत्र माह के अंतिम मंगलवार और शीतलाष्टमी की वजह से इस बार भीड़ हद से ज्यादा थी. हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे.
मंदिर का गर्भगृह काफी छोटा है, जबकि उसके बाहर का परिसर अपेक्षाकृत बड़ा है, जहां श्रद्धालु लाइन में लगते हैं. इसी परिसर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी लगी हुई हैं. मंदिर परिसर में लगी ग्रिल के पास बांस की बैरिकेडिंग की गई थी. बताया जा रहा है कि सबसे पहले यही बैरिकेडिंग टूटी, जिसके बाद हालात बिगड़ गए. जैसे ही बैरिकेडिंग टूटी, भीड़ में अफरा-तफरी मच गई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे. भारी भीड़ और मौके पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित हो गई.
क्या कह रही पुलिस?
बिहार पुलिस के डीजी कुंदन कृष्णन का कहना है कि यह हादसा भगदड़ की वजह से नहीं, बल्कि अत्यधिक गर्मी और डिहाइड्रेशन की वजह से हुआ है. डीजी ने कहा कि मंदिर परिसर में भारी भीड़ और छोटी जगह की वजह से श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई थी.
साथ ही उन्होंने मंदिर प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुजारी व्यवस्था संभालने के बजाय दक्षिणा पर अधिक ध्यान दे रहे थे.
बिहार के मंदिर में मची भगदड़, 9 लोगों की मौत, PM मोदी ने हादसे पर जताया शोक
चार पुलिसकर्मी सस्पेंड
हादसे के बाद डीजी कुंदन कृष्णन खुद दीपनगर पहुंचे और मंदिर परिसर का निरीक्षण किया. मौके पर नवादा जिले के एसपी, डीएसपी समेत पटना के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कैंप कर रहे हैं और पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं.
शुरुआती जांच में लापरवाही सामने आने के बाद थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. वहीं, हादसे की सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. डीजी ने कहा कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मंदिर की धार्मिक मान्यता
मघड़ा स्थित इस मंदिर की गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां माता की प्रतिमा खुदाई में मिली थी. शीतलाष्टमी के दिन यहां चूल्हा नहीं जलता और लोग ‘बासी’ (शीतला) भोजन ही ग्रहण करते हैं. माता को रोगों से मुक्ति देने वाली देवी माना जाता है, यही वजह है कि चैत्र के अंतिम मंगलवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे.
न्यास बोर्ड के दायरे से बाहर है मंदिर प्रबंधन
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन वर्तमान में पंडा समाज के हाथों में है और यह मंदिर न्यास बोर्ड के अंतर्गत नहीं आता. ग्रामीणों की मांग है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर की कमान न्यास समिति को सौंपी जानी चाहिए.
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