बिहार सरकार लोगों के लिए एक नई नीति लेकर आई है. जिसके तहत बिहार सरकार एक रुपये में जमीन दे रही है. दरअसल, सरकार ने राज्य में गन्ना आधारित उद्योंगो को नई गति देने के लिए और किसानों की आय को बढ़ाने के लिए बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री की अध्यश्रता में 24 जून 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वाकांक्षी नीति को स्वीकृति दी गई.

सरकार का दावा है कि यह देश की अपनी तरह की पहली व्यापक नीति है, जिसके जरिए चीनी मिल, इथेनॉल, डिस्टिलरी, सह-विद्युत उत्पादन और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जाएगा.

सरकार के अनुसार, बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने गन्ना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मॉडर्न शुगर कॉम्प्लेक्स की अवधारणा पर आधारित एकीकृत प्रोत्साहन नीति लागू की है. इस नीति का उद्देश्य राज्य की ऐतिहासिक चीनी उद्योग विरासत को पुनर्जीवित करना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है.

1 रुपये में मिलेगी 40 एकड़ तक जमीन

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गन्ना उद्योग विभाग या बिहार राज्य चीनी निगम की उपलब्ध भूमि मात्र 1 रुपये की टोकन राशि पर 30 वर्षों की लीज पर देने का प्रावधान किया है. इसके तहत अधिकतम 40 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही, भूमि खरीद पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी. उत्पादित चीनी पर पांच वर्षों तक एसजीएसटी की पूरी प्रतिपूर्ति भी निवेशकों को मिलेगी.

इथेनॉल और डिस्टिलरी उद्योग को भी मिलेगा बढ़ावा

नीति में इथेनॉल और डिस्टिलरी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है. नई डिस्टिलरी एवं इथेनॉल इकाइयों की स्थापना या क्षमता विस्तार के लिए प्लांट एवं मशीनरी में किए गए निवेश का 15 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा, ऋण पर ब्याज अनुदान और उत्पादित इथेनॉल पर एसजीएसटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति भी मिलेगी.

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नई चीनी मिल पर 100 करोड़ तक अनुदान

नई नीति के तहत 5000 टीसीडी (टन क्रशिंग प्रति दिन) क्षमता वाली नई चीनी मिल स्थापित करने पर निवेशकों को पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. वहीं, 3500 टीसीडी क्षमता वाली नई चीनी मिल लगाने पर 70 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी.

इसके अलावा, पहले से संचालित चीनी मिलों की क्षमता में कम से कम 1000 टीसीडी का विस्तार करने पर 15 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी. इससे अधिक क्षमता विस्तार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मिलेगा.