Bihar Election से पहले पंचायत प्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा, पोस्टर लगाकर पूछा- कब मिलेगा हमारा अधिकार?

Bihar Election Poster War: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी पारा हाई है। एक तरफ राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर वॉर जारी है, वहीं दूसरी ओर पोस्टर के जरिए विरोध की तस्वीर सामने आई है। विधानसभा चुनाव से पहले अब पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला दिया है।

Protest by putting up posters in Bihar

पोस्टर लगाकर जताया विरोध।

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सौरव कुमार, पटना।

बिहार में चुनावी साल होने की वजह से राजनीतिक दल एक-दूसरे पर निशाना साधने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। पटना की सड़कों पर पोस्टर वॉर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने कुछ दिन पहले पटना में एक पोस्टर के जरिए सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा था। इस पोस्टर के जरिए अपराध, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा और पलायन को लेकर सीएम पर निशाना साधा गया था। ये पोस्टर बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस की तरफ से लगाए गए थे। इसी बीच बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर पटना में राजनीतिक दलों के पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर विरोध दर्ज कराया है।

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राजनीतिक पार्टियों के कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर

विधानसभा चुनाव से पहले सरकार को अब पंचायत में जीते हुए जनप्रतिनिधियों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। अपने अधिकार को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों ने पटना के विभिन्न चौक चौराहा, विभिन्न राजनीतिक दल के पार्टी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर विरोध जताया है। मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला की तरफ से बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं।

क्या लिखा है पोस्टर में?

पोस्टर के जरिए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछा गया है। पोस्टर में ऊपर उन्होंने अपने अधिकार को लेकर स्लोगन के रूप में लिखा है,  ‘कब मिलेगा हमारा अधिकार? बिहार में सबसे नीचे पंचायती राज क्यों है?’

सरकार के खिलाफ लगाए पोस्टर

पोस्टर में इस बात का भी जिक्र है कि पंचायत जनप्रतिनिधि जब अपने अधिकार की बात करते हैं तो उन्हें केवल आश्वासन मिलता है। या चुप करा दिया जाता है। ग्राम कचहरी और पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। जबकि संविधान ने इन्हें मजबूत करने की बात कही है। मुखिया और पंच-सरपंच संघ का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। इस वजह से अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विकास कार्य नहीं कर पा रहे हैं। सरकार पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज कर रही है। चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों द्वारा पोस्टर लगाने की चर्चा सियासी गलियारे में जोर पकड़ने लगी है। माना जा रहा है कि पंचायत जनप्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपने अधिकार की मांग को लेकर अब सरकार को चुनौती देने की तैयारी में जुट गए हैं।

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