Womens World Cup 2025: भारतीय टीम ने महिला विश्व कप 2025 में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल में साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर इतिहास रच दिया. टीम इंडिया ने पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया. भारतीय खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया. स्मृति मंधाना ने भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए, जबकि दीप्ति शर्मा टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बनीं. हालांकि इन खिलाड़ियों का सफर इतना आसान नहीं रहा.

मंधाना ने भाई से ली प्रेरणा

सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने अपने भाई को देखकर क्रिकेट खेलना शुरू किया. उनके भाई श्रवण एक बार राहुल द्रविड़ से मिले थे. इस दौरान उन्होंने द्रविड़ से बल्ले पर साइन भी कराया. साल 2013 में जब स्मृति मंधाना ने भारत के लिए डेब्यू किया तो उन्होंने इसी बैट को लेकर डेब्यू किया.

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2011 वर्ल्ड कप सेलिब्रेशन देख शुरू किया क्रिकेट

साल 2000 में मुंबई में जन्मीं जेमिमा रोड्रिग्स का घर सचिन तेंदुलकर के घर के पीछे था. जब साल 2011 में भारत ने विश्व कप जीता ,तब सेलिब्रेशन देखकर जेमिमा ने क्रिकेटर बनने का फैसला किया. वह 12 साल की उम्र में ही अंडर-19 मुंबई टीम का हिस्सा बनीं. पिछले साल जेमिमा के पिता पर धार्मिक गतिविधियां करने का आरोप लगे. इसके बाद जेमिमा की सदस्यता रद्द कर दी गई.

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दीप्ति की ट्रेनिंग के लिए भाई ने छोड़ी नौकरी

दीप्ति के पिता रेलवे में नौकरी करते थे. उनके 4 भाई भी थे. सबसे छोटे भाई सुमित क्रिकेट की पर्सनल ट्रेनिंग लेते थे. 8 साल की उम्र में दीप्ति अपने छोटे भाई के साथ क्रिकेट खेलने जाने लगीं. दीप्ति पहले तेज गेंदबाजी करती थीं. लेकिन भाई ने उन्हें ऑलराउंडर बनने के लिए कहा. इसके बाद सुमित ने एमबीए किया. हालांकि उन्होंने दीप्ति को प्रैक्टिस कराने के लिए नौकरी छोड़ दी.

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सचिन को देख शुरू किया क्रिकेट

शेफाली वर्मा के पिता एक बार उन्हें कंधे पर बिठाकर सचिन तेंदुलकर का मैच दिखाने ले गए थे. इसके बाद ही उनके अंदर क्रिकेटर बनने की भूख जागी. वह बचपन में लड़कों के साथ भी मैच खेलने जाती थीं. शेफाली ने साल 2015 में 15 साल की उम्र में ही भारत के लिए डेब्यू किया.

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ट्रेनिंग के लिए पापा ने बंद किया बिजनेस

ऋचा घोष का जन्म सिलीगुड़ी में हुआ था. हालांकि उनके पिता ने ऋचा की क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए 13 साल की उम्र में सिलीगुड़ी छोड़कर कोलकाता शिफ्ट होने का फैसला किया. ताकि कोलकाता में उन्हें अच्छी कोचिंग मिल सके.

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