कौन हैं भारतीय मूल के अश्वथ कौशिक? जिन्होंने सिर्फ 8 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर को दी मात

Ashwath Kaushik Defeat Grandmaster: अश्वथ कौशिक ने इतिहास रच दिया है। भारतीय मूल के रहने वाले खिलाड़ी कौशिक ने सिर्फ 8 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर जेसेक स्टोपा को धूल चटा दिया है। चलिए आपको बताते हैं कौन हैं यह खिलाड़ी।

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Ashwath Kaushik Defeat Grandmaster: भारतीय मूल के शतरंज खिलाड़ी अश्वथ कौशिक ने इतिहास रच दिया है। अश्वथ ने सिर्फ 8 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर को हराकर बड़ा कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने पोलिश शतरंज ग्रैंडमास्टर जेसेक स्टोपा को बर्गडॉर्फर स्टैडथॉस में हराकर दिखा दिया कि भारतीय मूल का छोटा बच्चा भी ऐतिहासिक काम कर सकता है। अश्वथ शतरंज के क्लासिकल वर्जन में किसी ग्रैंड मास्टर को हराने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कौन हैं अश्वथ कौशिक, जिन्होंने सुनहरे अक्षरों में अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया है।

इससे पहले लियोनिद के नाम था रिकॉर्ड

बता दें कि अश्वथ कौशिक से पहले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी सर्बिया के लियोनिद इवानोविच थे, जिन्होंने ग्रैंड मास्टर को मात दी थी। लियोनिद भी 8 साल के ही थे, लेकिन वह अश्वथ से काफी बड़े थे। लियोनिद ने बेलग्रेड ओपन में 60 वर्षीय बुल्गारियाई ग्रैंडमास्टर मिल्को पोपचेव को मात देकर यह ऐतिहासिक काम किया था। लेकिन लियोनिद के नाम यह रिकॉर्ड अधिक दिन तक नहीं रह सका और अश्वथ ने इसे अपने नाम कर लिया है। चलिए आपको बताते हैं कौन हैं अश्वथ कौशिक।

2022 में भी किया था बड़ा कारनामा

अश्वथ कौशिक का जन्म भारत में ही हुआ था। सिर्फ 2 वर्ष भारत में बिताने के बाद वह सिंगापुर चले गए और वहीं से शतरंज के इस खेल में नए मुकाम की ओर बढ़ चले। कौशिक के लिए यह कोई पहली उपलब्धि नहीं है, इससे पहले भी साल 2022 में वह काफी सुर्खियों में रहे थे, जब खिलाड़ी ने ईस्टर्न एशियन यूथ चैंपियनशिप के अंडर-8 वर्ग में तिहरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस दौरान कौशिक सिर्फ 6 साल के थे। अब उन्होंने जिस ग्रैंडमास्टर को मात दी है, वह 37 साल के हैं और शतरंज की दुनिया के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, बावजूद इसके वह कौशिक के सामने नहीं टिक सके।

‘7 घंटे चेस खेलता है कौशिक’

कौशिक वर्तमान में FIDE में विश्व रैंकिंग में 37,338 स्थान पर विराजमान हैं। इस जीत के बाद कौशिक ने कहा कि मुझे अपने खेल और खेलने के अंदाज पर गर्व है। खेल के दौरान एक स्थिति ऐसी थी जब मैं बुरी तरह से फंस चुका था, मुझे लगा कि अब मैं यहां से नहीं निकल पाउंगा। लेकिन फिर मैं खराब स्थिति से वापसी करने में कामयाब रहा, जिसके कारण से मुझे यह जीत नसीब हो सकी। कौशिक के पिता श्रीराम ने कहा कि मेरा बेटा काफी मेहनती है। वह हर दिन लगभग 7 घंटे तक चेस की प्रैक्टिस करता है। वह शतरंज पर हजारों पहेलियों को हल करता है।

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