Virat Kohli Weakness: साल 2014 का इंग्लैंड दौरा तो आपको याद ही होगा। भारतीय टीम को इंग्लिश टीम के हाथों 3-1 से हार का मुंह देखना पड़ा था। इस दौरे को विराट कोहली के करियर का सबसे खराब टूर माना जाता है। कोहली इस बात को खुद भी स्वीकार करते हैं। विराट की एक कमजोरी पूरे दौरे पर उनके लिए जी का जंजाल बन गई थी। 14 पारियों में विराट एक अर्धशतक तक नहीं लगा सके थे। वही कमजोरी अब 10 साल बाद फिर से लौट आई है। बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में कोहली एक ही तरह से हर बार आउट होकर पवेलियन लौट रहे हैं। कंगारू तेज गेंदबाजों ने विराट के लिए जो चक्रव्यूह रचा है, उसमें कोहली हर बार उलझकर रह जा रहे हैं।
कोहली की 10 साल पुरानी कमजोरी
साल 2014 के इंग्लैंड दौरे पर विराट ऑफ स्टंप से बाहर जाती हुई गेंदों के खिलाफ खासा परेशान रहे थे। इस लाइन के आगे कोहली पूरी तरह से बेबस दिखाई दिए थे और जेम्स एंडरसन ने हर बार विराट को इसी अंदाज में पवेलियन की राह दिखाई थी। इंग्लैंड के उस टूर के बाद कोहली ने अपनी इस कमजोरी पर खूब काम किया था और इस अपना मजबूत हथियार बना लिया था।
हालांकि, 10 साल बाद फिर से विराट इसी कमजोरी के आगे संघर्ष करते हुए दिखाई दे रहे हैं। बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में कोहली चार में तीन पारियों में ऑफ स्टंप से बाहर जाती हुई गेंदों पर ही अपना विकेट देकर चलते बने हैं। पर्थ में हेजलवुड ने कोहली को इसी लाइन की मदद से पवेलियन की राह दिखाई थी, तो एडिलेड में स्टार्क और बोलैंड ने भी विराट के इस कमजोर पक्ष पर वार किया था।
कंगारू गेंदबाजों का मास्टर प्लान
विराट कोहली के लिए कंगारू तेज गेंदबाजों ने मास्टर प्लान तैयार किया है। भारतीय टीम के लिहाज से बुरी खबर यह है कि यह प्लान हर बार किंग कोहली के खिलाफ काम भी कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के फास्ट बॉलर्स अच्छे से जानते हैं कि विराट अगर क्रीज पर सेट हो गए, तो वह क्या कर सकते हैं। यही वजह है कि विराट के क्रीज पर आते ही कंगारू फास्ट बॉलर्स ऑफ स्टंप की लाइन पकड़ लेते हैं। कोहली अपनी पारी की शुरुआत में इस लाइन के खिलाफ थोड़ा असहज नजर आते हैं, जिसका भरपूर फायदा ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज उठा रहे हैं। खराब फॉर्म से अगर कोहली को पीछा छुड़ाना है, तो इस कमजोरी को साल 2014 की तरह ही काट जल्द से जल्द खोजना होगा।