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टी20 वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं हारे, फिर भी किस्मत के भरोसे क्यों है साउथ अफ्रीका? कोच ने कह दी हैरान करने वाली बात

T20 World Cup 2026: साउथ अफ्रीकी टीम को अक्सर ‘चोकर्स’ का तमगा दिया जाता है, क्योंकि वो अक्सर ग्लोबल टूर्नामेंट के नॉक आउट स्टेज में बाहर हो जाती है, प्रोटियाज टीम के कोच शुक्री कॉनराड का भी मानना है कि मौजूदा टी-20 वर्ल्ड कप में अब तक अनबीटेन रहने के बावजूद उन्हें थोड़ी किस्मत की जरूरत है.

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South Africa Coach Shukri Conrad

South Africa Coach Shukri Conrad: साउथ अफ्रीका ये मानने को तैयार है कि मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप शायद उनके हाथ से निकल जाए, क्योंकि नॉकआउट के करीब होने के साथ वो इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीमों में से एक बन गए हैं. टूर्नामेंट में अकेली बिना हारे टीम होने के नाते और को-होस्ट इंडिया और अपने सेमीफाइनल में विपक्षी टीम न्यूज़ीलैंड पर आसान जीत के साथ – साउथ अफ्रीका का मानना ​​है कि उन्होंने टाइटल के दावेदार माने जाने का हक कमाया है. वो इससे जो भी मिलता है, उससे पीछे नहीं हट रहे हैं.

‘किस्मत की जरूरत’

दिल्ली में जिम्बाब्वे के खिलाफ टूर्नामेंट में अपनी लगातार 7वीं जीत के बाद, उनके हेड कोच शुक्री कॉनराड ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि हम फेवरेट हैं, क्योंकि मुझे हमेशा लगता रहा है कि एक साउथ अफ़्रीकी टीम के तौर पर, आप फेवरेट के तौर पर खेलना चाहते हैं. अंडरडॉग होना आसान है, आप जानते हैं. उम्मीदें उतनी बड़ी या ज्यादा नहीं होतीं. अब हमने (फेवरेट का) टैग ले लिया है, जिसके बारे में हम ज्यादा बात नहीं करते हैं. अगर हम वही करते रह सकते हैं जो हम कर रहे हैं, और (हमें) रास्ते में थोड़ी किस्मत की भी जरूरत है, तो उम्मीद है कि बुधवार (4 मार्च) को हमें इसका नतीजा मिलेगा. और फिर फाइनल के लिए अहमदाबाद में हमारे होम ग्राउंड पर.’

यह भी पढ़ें- टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बावजूद क्यों नहीं हुई वेस्टइंडीज टीम की घर वापसी? सामने आई बड़ी वजह

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लक की जरूरत क्यों?

कोच शुक्री कॉनराड ने किस्मत की बात इसलिए कही है क्योंकि साउथ अफ्रीका पर अक्सर ‘चोकर’ का टैग लगता है, जो क्वॉर्टरफाइनल, सेमीफाइनल या फाइनल जैसे नॉकआउट स्टेज में हारकर ट्रॉफी जीतने का चांस गंवा बैठती है, ये सिलसिला वर्ल्ड कप 1992 से चला आ रहा है, एक या दो मौकों को छोड़कर प्रोटियाज टीम का लक खराब रहा है.

ह्यूमर भरा अंदाज

कॉनराड ने ये सब अपनी आंखों में थोड़ी शरारत और आवाज में हल्केपन के साथ कहा – ये तरीका और टोन पहले के साउथ अफ़्रीकी कोचों से बहुत अलग था, जो उनके मौकों को कम आंकने की कोशिश करते थे. ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि वो अकेले ऐसे हैं जिन्होंने साउथ अफ्रीका को ‘वर्ल्ड’ शब्द वाली ट्रॉफी दिलाई, जब उन्होंने जून में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप गदा उठाई थी.

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हालांकि उनके रवैये का हल्कापन शायद उनके नजरिए की वजह से है. कॉनराड एक रियलिस्ट हैं, जिन्होंने ईएसपीएनक्रिकइंफो को बताया कि साउथ अफ़्रीकी होने की वजह से उन्हें दुनिया को एक खास तरह से देखना पड़ता है, क्योंकि ‘हमारे देश में, माइनॉरिटी लोग मजे के लिए चलते हैं लेकिन ज्यादातर लोग अभी भी काम पर जाने के लिए चलते हैं’. तो, खेल वैसा ही है जैसा उसे होना चाहिए: पहले खुशी, बाद में नौकरी.

प्रेशर को हैंडल करने पर जोर

वो इसी नजरिए को फाइनल फोर में भी ले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हमेशा प्रेशर रहता है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस प्रेशर के साथ क्या करते हैं और आप प्रेशर को कैसे शिफ्ट करते हैं. ये असल में उस प्रेशर को अपनाने के बारे में है. और हम कुछ अलग नहीं करते. हम न्यूज़ीलैंड के लिए भी ठीक उसी तरह तैयारी करेंगे और चाहे हम उस गेम को फेवरेट के तौर पर शुरू करें, शायद इसलिए क्योंकि हम कॉम्पिटिशन में अकेली बिना हारे टीम हैं. मुझे नहीं पता कि इससे प्रेशर बढ़ता है या नहीं. एक सेमीफाइनल ही काफी प्रेशर है. न्यूजीलैंड जैसी टॉप टीम के साथ खेलना काफी प्रेशर है. इसलिए कोई एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं है.’

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सिर्फ एक मैच में हार करीब थी

और अगर प्रेशर था भी, तो साउथ अफ़्रीका को लगता है कि उन्होंने दिखा दिया है कि वो इससे निपट सकते हैं. इस टूर्नामेंट में इकलौते गेम जहां उन्हें पीछे छोड़ा गया था, वो ग्रुप स्टेज में अफगानिस्तान के खिलाफ था, जहां उन्हें डबल सुपर ओवर तक ले जाया गया था. तब भी वो आखिरकार जीत गए. उस नतीजे का मतलब था कि साउथ अफ़्रीका ने उस ग्रुप ऑफ डेथ में एक संभावित हार से उबर लिया जिसे बनाना स्किन कहा गया था. अपने नाम 2 जीत के साथ, वो न्यूजीलैंड के मैच में तकरीबन कुछ भी दांव पर लगाए बिना गए थे. तब से, लगभग सब कुछ उनके पक्ष में रहा है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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