माता-पिता ने की मजदूरी, खुद बने टैक्सी ड्राइवर, अब इटली की टी20 वर्ल्ड कप टीम में मिली इस भारतीय मूल के क्रिकेटर को एंट्री

Jaspreet Singh Italian Cricketer: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इटली की टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ी जसप्रीत सिंह हैं, जिनका जन्म 9 जून 1993 को पंजाब के शहर फगवाड़ा में हुआ. उनकी जर्नी काफी इंस्पायरिंग है, जो उन्होंने खुद सुनाई है.

Jaspreet Singh Italy Cricketer

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Jaspreet Singh Italy Cricketer Inspiring Story: टी20 वर्ल्ड कप में इटली ने पहली बार एंट्री की है, इस टीम में एक ऐसा खिलाड़ी है जिसकी जड़ें भारत में है. हम बात कर रहे हैं जसप्रीत सिंह की जिसका सफर पंजाब के फगवाड़ा से शुरू हुआ और इंग्लैंड होते हुए इटैलियन क्रिकेट टीम तक पहुंच गया.

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10 साल की उम्र में पहुंचे इटली

जसप्रीत सिंह ने पीटीआई से कहा, ‘चलो! हम हिंदी में बात करेंगे.’ एक इटैलियन क्रिकेटर के इंटरव्यू से पहले ये लाइन अक्सर सुनने को नहीं मिलती. लेकिन जसप्रीत सिंह ने 22 साल पहले 10 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ इटली के शहर बर्गमो जाने के बावजूद, न तो अपनी भाषा और न ही अपने होमटाउन फगवाड़ा (पंजाब) से अपना रिश्ता भुलाया है.

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मुश्किलों भरा सफर

इटली में शुरुआती दिन आसान नहीं थे, क्योंकि उनके पिता तीरथ सिंह और मां जसवीर कौर को एक अनजान शहर में फैक्ट्री मजदूर के तौर पर बसना पड़ा था. जसप्रीत ने बताया, ‘जब हमें इटली जाने का मौका मिला, तो यह मेरे परिवार के लिए एक बड़ा दिन था. लेकिन हम थोड़े फिक्रमंद भी थे क्योंकि ये एक नया देश, नई भाषा और नई संस्कृति थी. सब कुछ हमारे लिए नया था. लेकिन मैं सोच रहा था कि क्रिकेट कैसे खेलूं, जो मैं अपने शहर में बचपन में खेला करता था.’

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जब क्रिकेट की तरफ बढ़ाया कदम

एक नए खिलाड़ी के लिए क्रिकेट के मामले में इटली जैसी जगह पर जाना मुश्किल था, क्योंकि इस यूरोपीय देश में शायद ही कोई सही इंफ्रास्ट्रक्चर था. उन्होंने वहां के बर्गमो क्रिकेट क्लब में एडमिशन लिया, जो ज्यादा से ज्यादा एक मामूली फैसिलिटी थी, लेकिन उन्होंने अपने पिता के काम में मदद करने के लिए 2 साल का इलेक्ट्रीशियन कोर्स भी पूरा किया. हालांकि जसप्रीत को जल्द ही लोकल गुरुद्वारे में मिले कुछ भारतीय प्रवासियों की मदद से अपने क्रिकेट स्किल को बेहतर बनाने का एक तरीका मिल गया.

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इंग्लैंड में बने टैक्सी ड्राइवर

उन्होंने उसे इंग्लैंड जाकर टर्फ विकेट पर क्रिकेट खेलने की सलाह दी, और बर्मिंघम में रहते हुए अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उसे उबर ड्राइवर के तौर पर भी काम करना पड़ा. उन्होंने कहा, ‘जब मैं बच्चा था तो इंडिया में क्रिकेट खेलता था और जब मैं इटली गया तो मैं वही करना चाहता था. लेकिन जब मैं इटली गया, तो वहां क्रिकेट नहीं था, कोई असली स्टेडियम या ग्राउंड नहीं थे जैसे मैंने पंजाब में देखे थे.’

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कॉम्पिटिटिव बर्मिंघम एंड डिस्ट्रिक्ट प्रीमियर लीग में खेलने वाले जसप्रीत ने आगे कहा, ‘जब मुझे इसके बारे में पता चला, तो इंग्लैंड शिफ्ट होने के बाद मैंने खेलना शुरू किया क्योंकि वहां टर्फ विकेट थे, और खर्चों को पूरा करने के लिए मुझे कोई दूसरा रास्ता ढूंढना पड़ा, इसलिए मैंने उबर चलाना शुरू किया, जिससे मुझे समय में भी काफी फ्लेक्सिबिलिटी मिली.’

2019 में इंटरनेशनल डेब्यू

इस मेहनत का फायदा हुआ और जसप्रीत, जो एक राइट-आर्म पेसर हैं, उन्होंने 2019 में नॉर्वे के खिलाफ इटली के लिए डेब्यू किया. इटली टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए क्वालीफाई करने के करीब भी पहुंच गया था, लेकिन आयरलैंड से करीबी हार ने उनकी उम्मीदें खत्म कर दीं.

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हालांकि इटली की टीम ने एक साल बाद जून 2025 में यूरोपियन रीजनल क्वालिफायर में टॉप करके अपना सपना पूरा किया. जसप्रीत ने कहा, ‘ये हमारे लिए गर्व की बात है. हम लंबे समय से क्वालीफाई करने की कोशिश कर रहे थे. और हमारी टीम पिछले 3 सालों से बहुत कड़ी मेहनत कर रही है. और हम भगवान के शुक्रगुजार हैं कि हम इस बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर पाए. ये टीम पिछले तीन-चार सालों से वही है. सब एक-दूसरे को जानते हैं और सब अपने रोल्स जानते हैं. और हम अभी भी बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं.’

‘हम मुकबला करने आए हैं’

जसप्रीत सिंह ने कहा, ‘हम सिर्फ वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने नहीं आए हैं, हम मुकाबला करने भी आए हैं.’ जसप्रीत के लिए भारत की यात्रा सिर्फ अपने घर लौटने के बारे में नहीं है, बल्कि देश में वर्ल्ड-क्लास क्रिकेट फैसिलिटीज एक्सपीरिएंस करने का भी एक मौका है.

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‘गर्व का मौका’

उन्होंने कहा, ‘ये हमारे लिए एक बेहतरीन एहसास है. मैं बचपन से इन ग्राउंड्स को देखता आ रहा हूं. हमारे महान दिग्गज जैसे कपिल देव, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और विराट कोहली इन ग्राउंड्स में खेले हैं. तो, यहां आकर उस माहौल में खेलना… चिदंबरम स्टेडियम (प्रैक्टिस मैच), ईडन गार्डन्स, वानखेड़े. ये हम सभी के लिए एक सपने के सच होने जैसा है. हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हम यहां तक पहुंचे हैं.’

‘एक्सपीरिएंस आएगा काम’

जज्बाती पहलुओं से परे, जसप्रीत ने माना कि ये पूरा एक्सपीरिएंस टीम को इंडियन कंडीशन और स्टेडियम के डाइमेंशन के हिसाब से ढलने में मदद करेगा. उन्होंने कहा, ये मददगार है क्योंकि आपको यहां की कंडीशंस के बारे में पता चलता है, डाइमेंशन क्या है और विकेट कैसा है. इसमें क्या अच्छा है? क्या ये स्पिन के लिए अच्छा है या फास्ट बॉलिंग के लिए?

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जसप्रीत सिंह ने कहा, ‘तो हम कंडीशंस चेक कर रहे हैं. और हमारे पास 15 अच्छे लड़के हैं. और विकेट के हिसाब से, वa सबसे अच्छा कॉम्बिनेशन खेलेंगे.’ 32 साल के खिलाड़ी ने उम्मीद जताई कि टीम मैनेजमेंट इटैलियन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए यहां की सुविधाओं से कुछ सीख ले सकता है.

बेहतर की उम्मीद

उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ी बहुत अच्छे हैं, क्योंकि उनके पास अच्छे स्किल सेट हैं. लेकिन वहां दिक्कत स्ट्रक्चर की है. लेकिन अब वर्ल्ड कप के साथ, हमें उम्मीद है कि सुविधाएं बेहतर होंगी. हम चेन्नई में खेले हैं, और अब हम कोलकाता जा रहे हैं और फिर मुंबई जाएंगे. ये हमारे लिए स्टेडियम और विकेट के बारे में जानने का मौका है और फिर इटली में भी ऐसा ही करेंगे. उम्मीद है, हम अपनी परफॉर्मेंस से भी प्रभावित कर पाएंगे क्योंकि ऐसे मौके बार-बार नहीं आते.’

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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